शरद पूर्णिमा पर कर्णवेधन से किया दमा का इलाज

उज्जैन। कर्णवेधन के जरिए जटिल बीमारी दमा का इलाज कराने के प्रति मरीजों में विशेष रुचि देखी गई। इस बार १२०० से अधिक रोगियों ने इस विधा के जरिए इलाज कराया।
कर्णवेधन के जरिए रोगियों के इलाज का विशेष शिविर शरद पूर्णिमा की रात इंदिरा नगर में प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रकाश जोशी ने आयोजित किया था। इंदिरा नगर सहयोगी मंडल के तत्वावधान में आयोजित विशेष शिविर का यह २३वाँ वर्ष था। संयोजक डॉ. प्रकाश जोशी ने बताया कि शिविर में म.प्र. के अलावा राजस्थान, गुजरात, बिहार, बंगाल प्रदेश के मरीज भी इलाज कराने आए।
रातभर चला भजन-पूजन, ब्रह्ममुहूर्त में इलाज
बुधवार शाम ६ बजे शिविर का शुभारंभ और बाबा हनुमान व भगवान धन्वन्तरि की पूजन के साथ हुआ। बात हनुमान भक्त मंडल के सदस्यों ने गायक सुरेश शर्मा के साथ संगीतमयी सुंदरकाण्ड प्रस्तुत किया। इसके बाद रातभर भजन कीर्तन का दौर चला। सुबह ४ बजे से ब्रह्ममुहूर्त में दमा रोगियों का कर्णवेधन से इलाज शुरू हुआ, जो करीब ३ घंटे चला। इस दौरान शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा की रोशनी में विशेष तकनीक से तैयार की गई खीर में अभिमंत्रित दवा मिलाकर मरीजों को सेवन कराया गया।
आयुर्वेद का चिकित्सा शिविर भी आयोजित
इस मौके पर विशेष चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया। इसमें शासकीय धन्वन्तरि महाविद्यालय के डॉ. वी.पी. व्यास, डॉ. अजयकीर्ति जैन, डॉ. योगेश वाणे, डॉ. निरंजन सर्राफ, डॉ. वंदना सर्राफ, वैद्य सुदर्शन त्रिवेदी ने करीब एक हजार से अधिक रोगियों का इलाज आयुर्वेद पद्धति से किया। आयुर्वेद महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का विशेष सहयोग रहा। इंदिरा नगर सहयोगी मित्रमंडल के हरिओम राय, परिवेश राय, मनोज बंसल, अवनीश नागर, ललित नागर, देवेन्द्र मेहता, चेतन नागर, राहुल नागर, प्रीतम ने मरीजों की सेवा में सहयोग किया।
क्या है कर्णवेधन चिकित्सा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रकाश जोशी ने बताया कि शरीर में मौजूद 12 जोड़ी क्रेनियल नर्व की 10वीं वेगस नर्व की ब्रांच को कर्णवेधन से संयमित किया जाता है। जिससे दमा रोग से मुक्ति मिलती है। दमा रोग कफ प्रधान व्याधि है और इसका प्रधान चन्द्रमा होता है। शरद पूर्णिमा की रात चन्द्र १६ कलाओं से युक्त होता है, इस कारण वेगस नर्व को संयमित करने का यह विशेष दिन होता है। इसी दौरान दवाई भी अभिमंत्रित की जाती है।