गरीबों के जीवन में उतरती रोशनी

क्राउडफंडिंग एक आधुनिक सौगात है, यह वह प्रक्रिया है, तकनीक है, चंदे का नया स्वरूप है जिसके अन्तर्गत जरूरतमन्द अपने इलाज, शिक्षा, व्यापार आदि कीे आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है। विदेशों में यह लगभग स्थापित हो चुकी है और भारत में इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है। न केवल व्यक्तिगत जरूरतों के लिये बल्कि तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों और जनकल्याण उपक्रमों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। अनेक हिन्दी फिल्में क्राउडफंडिंग के सहारे बनी हंै। अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है। भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में इसका प्रयोग अधिक देखने में आ रहा है। अभावग्रस्त एवं गरीब लोगों के लिये यह एक रोशनी बन कर प्रस्तुत हुआ है।

ललित गर्ग

इनदिनों अनेक क्षेत्रों में प्रभावी प्रस्तुति एवं हिस्सेदारी के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु चर्चित हुआ है। इसके कार्यकारी अधिकारी श्री पीयूष जैन है, जिनका मानना है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिंग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि अनेक बहुआयामी योजनाओं को आकार देने का आधार भी यही होगा। उन्होंने बताया कि भारत में हर छोटी-बड़ी जरूरतों के लिये अब क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जा रहा है। वे इस बात की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं कि आम नागरिक को सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये क्राउडफंडिंग को बढ़ावा देना चाहिए।

इम्पैक्ट गुरु ने क्राउडफंडिंग के माध्यम से करोड़ों रूपयों की चिकित्सा सहायता एवं अन्य जरूरतों के लिये आर्थिक संसाधन जुटाये हैं। वेटर की दो वर्षीय बेटी सम्प्रति अपनी असाध्य ल्यूकेमिया बीमारी से उबरने एवं स्वस्थ होने में इसी माध्यम से सहयोग हासिल किया, जिसके लिये इम्पैक्ट गुरु ने प्रयास किये। उसका इलाज इसी तरह के सहयोग संभव हुआ है।  8 वर्षीय अहंती के दिल की सर्जरी का इलाज अत्यधिक खर्चीला होने के कारण उसके मध्यम वर्गीय माता-पिता के लिए वहन करना संभव नहीं था। उन्होंने इम्पैक्ट गुरु के सहयोग से क्राउडफंडिंग के माध्यम से धन जुटाना शुरू किया और उन्होंने 7 दिनों के भीतर लक्ष्य राशि प्राप्त कर ली। इस तरह से इम्पैक्ट गुरु के सहयोग से इस 8 वर्षीय बच्ची का सफलतापूर्वक इलाज हो सका।

केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है। यश चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपने ‘कैफे अर्पन’ को खोलने के लिए अपेक्षित धन की पूर्ति के लिए इम्पैक्ट गुरु के जरिये क्राउडफंडिंग का सहारा लिया। विकार ग्रस्त युवकों द्वारा संचालित यह एक अनूठा और अद्वितीय कैफे है। इम्पैक्ट गुरु ने इसके लिये निःस्वार्थ सेवाएं दी और वे लक्ष्य राशि से अधिक धन जुटाने में सफल हुए। कैफे अब खुल गया है और प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। यह कैफे इन युवकों के लिये जीने की आस बन कर प्रस्तुत हुआ है। इसी तरह रेड डॉट फाउंडेशन मुंबई को महिलाओं के लिए सुरक्षित शहर बनाने के लिए काम करता है जिसमें महिलाएं अपना मूक योगदान देती हैं। इम्पैक्ट गुरु के सहयोग से शहर भर में 500 लड़कियों को सुरक्षा मुद्दों एवं उनके कानूनी अधिकारों की दृष्टि से शिक्षित करने के लिये अपेक्षित आर्थिक संसाधन जुटाने में क्राउडफंडिंग को आधार बनाया है।

देखने में आ रहा है कि क्राउडफंडिंग ‘चंदा’ का आधुनिक संस्करण है, जिसके सहयोग से सत्संग, दुर्गा पूजा, कांवड यात्रा, अनुष्ठान, यज्ञ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के धन जुटाया जाता है। साथ-ही-साथ शिक्षा संस्थान, अस्पताल, धर्मशाला, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम आदि की आर्थिक जरूरतें भी क्राउडफंडिंग की सहायता से पूरी  होने लगी है। चंदे एवं क्राउडफंडिंग में जो मूल फर्क देखने को मिलता है, वह यह है कि चन्दा प्रायः धार्मिक कार्यों के लिये ही दिया जाता रहा है जबकि क्राउडफंडिंग का क्षेत्र व्यापक है और इसमें धार्मिक कार्यांे के साथ-साथ अन्य सार्वजनिक कार्य या व्यावसायिक कार्य जैसे पुल बनवाना, मोहल्ले की सफाई कराना, सड़क बनवाना या बालिकाओं को शिक्षित करना, चिकिता या फिर फिल्म बनाने का काम हो, या पत्रकारिता से जुड़ा उपक्रम हो, इनमें क्राउंडफंडिंग का इस्तेमाल अब आम हो गया है।

श्री पीयूष जैन भारत में क्राउडफंडिंग के भविष्य को लेकर बहुत आशान्वित है। उनका इम्पैक्ट गुरु भारत में जनकल्याण के विविध उपक्रमों के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गैर लाभकारी संगठनांे के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। उसने अपोलो अस्पताल के साथ भी एक इकरार किया है जिसमें जरूरतमंद रोगियों के लिये क्राउडफंडिंग की जायेगी। इम्पैक्ट गुरु क्राउडफंडिंग के माध्यम से भारत के लोगों में दान की परम्परा को एक नई शक्ल देगा। बड़े दानदाता ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे दान को प्रोत्साहन किया जा सकेगा। मध्यमवर्ग के लोगों में भी दान देने का प्रचलन बढ़ाना इसका लक्ष्य है। विशेषतः युवकों मंे जनकल्याण एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए दान की परम्परा के प्रति आकर्षण उत्पन्न किया जाएगा, जिसके माध्यम से सेवा और जनकल्याण के नये उपक्रम संचालित हो सकेंगे।

इम्पैक्ट गुरु मंच की कोशिश से भारत में 33 लाख गैर लाभकारी संगठनों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाया जा सकेगा। क्योंकि इन गैर लाभकारी संगठनों के सम्मुख धन उगाने के परम्परागत तरीकें बहुत खर्चीले हैं, जो कुल धन का खर्च 35 प्रतिशत तक है, जिसे इस नई तकनीक के अंतर्गत 5 प्रतिशत तक किया जाएगा। क्राउडफंडिंग की परंपरा को भारत में व्यापक बनाने के लिये इम्पैक्ट गुरु के साथ-साथ अनेक संगठन और लोग विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। दुनिया की सबसे बड़ी क्राउडफंडिंग कंपनी ‘किकस्टार्टर’ कमोबेश हर क्षेत्र जैसे फिल्म, पत्रकारिता, संगीत, कॉमिक, वीडियो गेम से लेकर विज्ञान और तकनीक, चिकित्सा, शिक्षा के लिए क्राउडफंडिंग करती है। किकस्टार्टर ने पिछले वर्ष तक 224 देशों के 58 लाख लोगों से तकरीबन दस अरब रुपये जुटाए हैं। इसका इस्तेमाल दो लाख लोगों ने विभिन्न योजनाओं के लिए किया हैं। अब भारत में इम्पैक्ट गुरु भी कुछ ऐसा ही अनूठा, विलक्षण और संगठित प्रयास करने को तत्पर दिखाई दे रहा है।  आज के समय में क्राउडफंडिंग एक ऐसा मंच माना जा रहा है, जिसके जरिए उन बहुआयामी योजनाओं को पूरा किया जा सकता है जो आधी-अधूरी हालात में है।  ऐसे अनेक सार्वजनिक काम हैं जो निर्मित हो चुके हैं एवं फण्ड की कमी के कारण चलयमान नहीं हो पाए हैं, उन्हें सफलतापूर्वक क्रियाशील बनाने में क्राउडफंडिंग रामबाण औषधि का कार्य करेंगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब देश में नये-नये प्रयोग कर रहे हैं तो उन्हें भी क्राउडफंडिंग के जरिये सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सशक्त बनाने के लिये आगे आना चाहिए। आयुष्मान भारत के लिये तो यह बहुत उपयोगी हो सकता है। आनलाइन के इस युग में क्राउडफंडिंग का भविष्य उज्ज्वल ही दिखाई दे रहा है। हरियाणा के सिरसा जिले के एक गांव में गांववाले क्राउडफंडिंग के जरिए 1 करोड़ रुपये इकट्ठा कर एक पुल का निर्माण किया हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हंै जो क्राउडफंडिंग की उजली सुबह की आहट कहे जा सकते हैं। पीयूष जैन के इस कथन में सच्चाई है कि ‘सरकार हमारे तमाम मसले नहीं सुलझा सकती और जनता अपने बीच की समस्याओं के समाधान के लिये खुद ही आगे आना चाहती है। मध्य और उच्च वर्ग के लोग न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि जनकल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं के लिये दान करना चाहते हैं। लोग एक-दूसरे की मदद भी करना चाहते हैं। लगता है आने वाले समय में छोटे-छोटे दान बड़ी योजनाओं को आकार देने के माध्यम बनेंगे।

पीयूष जैन स्वीकारते हैं कि क्राउडफंडिंग भारत में काफी सफल होगा। यहां अमीर-गरीब के बीच गहरी खाई है। यह उसे पाटने में अहम भूमिका निभा सकता है. इसके जरिए अमीर मिलकर गरीबों की मदद कर सकते हैं। इससे उन लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा, जो पैसों की कमी की वजह से बुनियादी जरूरतों से महरूम रह जाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तकनीक के मामले में भारत की दुनिया में अलग पहचान है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जो कि अब कला, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन को समृद्ध  करने की भी हो जायेगी। ऐसा होने से क्राउडफंडिंग की उपयोगिता एवं महत्ता सहज ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी।