एनबीएफसी का लघु अवधि के कोष पर निर्भर रहना अदूरदर्शी रणनीति : रिजर्व बैंक

मुंबई, पांच अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को लघु अवधि के कोष पर अत्यधिक निर्भरता के लिए आड़े हाथ लिया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह एक ‘अदूरदर्शी रणनीति’ है, जो कंपनियों के साथ प्रणाली की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

केंद्रीय बैंक का यह बयान आईएलएंडएफएस में बड़ा संकट सामने आने के बाद आया है। इसकी वजह से सरकार ने आईएलएंडएफएस का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है और उसके बोर्ड को भी बदल दिया है।

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं उन्हें प्रोत्साहित करना चाहूंगा, सभी से कहना चाहूंगा कि वे लघु अवधि के कोष के बजाय इक्विटी ओर दीर्घावधि के वित्तपोषण पर ध्यान दें।

आचार्य ने कहा कि ऋण में बाजार हिस्सेदारी हासिल करने को निचली वित्तपोषण की सीमान्त लागत के पीछे भागना एक अदूरदर्शी रणनीति है।

उनके सहयोगी डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन ने कहा कि पिछले दो साल में एनबीएफसी ने तेजी से विस्तार किया है और वे वित्तपोषण के विविध स्रोतों पर निर्भर रहे हैं। इसमें लघु अवधि के वाणिज्यिक पत्र भी हैं।

बिना किसी कंपनी का नाम लिए आचार्य ने कहा कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड और सरकार नजदीकी से स्थिति पर नजर रखें हैं।