राम मंदिर पर सुनवाई का रास्ता खुला

अयोध्या के राम मंदिर विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ही 1994 के फैसले को यथावत रखते हुए इस मामले की सुनवाई में आ रही बाधा को दूर कर दिया है। अब न्यायालय केवल विवादित भूमि के मालिकाना हक का निपटारा करेगी। दरअसल 1994 में इस्माल फारुकी प्रकरण में षीर्श न्यायालय ने फैसला दिया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। फारूकी के वकील राजीव धवन ने मस्जिद में नमाज पढ़ने के अधिकार को बहाल करने की मांग की थी। किंतु अदालत ने 1994 के फैसले को बहाल रखने के साथ इस मामले की सुनवाई 5 सदस्यीय खंडपीठ में भेजने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने जब 5 दिसंबर 2017 को इस विवाद की सुनवाई नियमित षुरू करने का निर्णय लिया, तब मुस्लिम पक्षकार फारुकी ने