आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बैंक अकाउंट से लिंक करना जरूरी नहीं

नयी दिल्ली। केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 122 करोड़ जनता की पहचान बन चुका है आधार। इसी के साथ उन्होंने कहा कि आधार आपको अलग बनाता है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की संविधान पीठ को सौंपा गया था। जस्टिस सीकरी ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि आधार यूनिक है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें:
– सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है; आधार का अर्थ अनूठा है।

– आधार को बैंक से नहीं कर सकते लिंक।

– आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमिट्रिक आंकड़े एकत्र किये हैं।

– संवैधानिक रूप से वैध है आधार।

– स्कूल से आधार की अनिवार्यता खत्म।

– मोबाइल फोन को आधार से लिंक करना अनिवार्य नहीं।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं। अदालत द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने पर अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया था कि 1973 के केसवानंद भारती के ऐतिहासिक मामले के बाद सुनवाई के दिनों के आधार पर यह दूसरा मामला बन गया है। पीठ में न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी थे।

श्याम दीवान, गोपाल सुब्रमण्यम, कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, अरविंद दतार, के वी विश्वनाथ, आनंद ग्रोवर, सजन पूवैया और कुछ अन्य वरिष्ठ वकीलों ने आधार का विरोध करने वाले याचिकाकताओं की ओर से दलीलें दी है।