‘बीचवाले’ वास्तविक पृष्ठभूमि के साथ एक कॉमेडी शो है – अनन्या खरे

सवालः सोनी सब के ‘बीचवाले- बापू देख रहा है’ में चंचल बीचवाले के रूप में अपने किरदार के बारे में बतायें।
सोनी सब के नये शो ‘बीचवाले’ में मेरा किरदार बॉबी बीचवाले की पत्नी चंचल बीचवाले की है। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार की गृहिणी है। दिल्ली में उसके पति के पास एक गैराज है और एक मोटर मैकेनिक की दुकान है। चंचल बहुत खुशमिजाज, मिलनसार और देखभाल करने वाली इंसान है। उसे अपने परिवार के साथ रहना पसंद है और वह उन्हें खुश रखना चाहती है। उसका सबसे बड़ा सपना है कि उसे बच्चों को अच्छी शिक्षा और नौकरी मिले। हर किसी को खुश होना चाहिये। वह आम मध्यमवर्गीय परिवार की गृहिणी की तरह सामान्य कामों में लगी रहती है, जोकि अपने घर को बहुत अच्छी तरह से रखती है। उसे अपनी मां, परिवारवालों से बातें करना अच्छा लगता है। उसे इंटरनेट से नई-नई चीजें सीखना अच्छा लगता है।

सवालः फिल्म से लेकर टेलीविजन तक के अपने सफर के बारे में बतायें।
मैंने टीनएज में फिल्मों का सफर शुरू किया था। मेरी पहली फिल्म दिल्ली में बनी थी, उसके बाद मैं मुंबई आ गई थी। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि गुलज़ार साब, जया बच्चन, मदन बावरिया, बासु चटर्जी, महेश भट्ट, ऋषिककेश मुखर्जी जैसे प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके प्रोफेशन की तरफ लोग देखते हैं। मैंने संजय के साथ ‘देवदास’ और मधुर के साथ ‘चांदनी बार’ की। दोनों ही फिल्मों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे यह भूमिकाएं मिलीं और उन यूनिट्स के साथ काम करके मैं बहुत खुश हूं।

सवालः पहले की भूमिकाओं से चंचल बीचवाले की भूमिका अलग है, इस भूमिका के लिये हां कहने की क्या वजह रही? क्या आपको लगता है कि नेगेटिव भूमिकाओं को निभाने को लेकर एक धारणा होती है?
इस भूमिका के लिये हां कहने की वजह यह रही कि हाल में निभाई गई भूमिका से यह बिलकुल अलग है। मेरी कुछ भूमिकाओं को लोगों द्वारा पसंद किये जाने और लोगों द्वारा मेरे अभिनय की तारीफ किये जाने के कारण, निर्माताओं और निर्देशकों ने मुझसे संपर्क करना शुरू किया। उन्होंने भावनाओं से भरपूर रोमांच, ड्रामा, नकारात्मक भूमिकाओं के लिये मुझसे संपर्क करना शुरू किया। चंचल बीचवाले उन भूमिकाओं से बिलकुल अलग है। वह उन लोगों में से है, जो अपनी भूमिका और परिवार के साथ खुश है। वह अपने परिवार की देखभल करना चाहती है और यह देखती है कि वह अच्छा कर रहे हैं। बाकी मध्यमवर्गीय परिवार की महिला की तरह उसकी सबसे बड़ी चिंता उसका परिवार है। साथ ही यह सोनी सब है और यह एक कॉमेडी शो है। इसमें कोई नकारात्मकता या ग्रे शेड नहीं है। चंचल प्यारी है और सबको पसंद आती है। अश्विनीजी का लेखन बेहद खूबसूरत है। आपने यह जरूर देखा होगा कि उसका किरदार बेहद वास्तविक है, जीवन से जुड़ा हुआ है। यह भूमिका कुछ ऐसी है, जो मैंने पिछले 5-6 साल में नहीं निभाई है, इसलिये यह मेरे लिये बहुत नया है।

आज के समय में दर्शकों को सारी जानकारी होती है और उनके पास कई सारे माध्यम है। उन्हें पता है कि नकारात्मक भूमिका निभाने वाले खुद बुरे नहीं होते हैं। इसलिये, जब वह आपको नकारात्मक भूमिका निभाते हुए देखते हैं तो वह ड्रामे के नजरिये से देखते हैं। उन्हें किरदार से अलग तरह की संतुष्टि मिलती है। उन्हें महसूस होता है कि नकारात्मक किरदार से ड्रामा बनता है। वह आपको उस किरदार से नहीं तौलते जिसे आप निभा रहे हैं। आप जो किरदार निभा रहे हैं, कुछ लोग उससे काफी गहराई से जुड़ जाते हैं, वह शायद सोच सकते हैं कि यह बहुत नकारात्मक है, लेकिन वह आपकी भूमिका से भावनात्मक रूप जुड़े होते हैं। वह आपके द्वारा निभायी जा रही भूमिका के नजरिये से आपको देखते हैं। अब मैं ‘बीचवाले’ में इस तरह की कॉमिक भूमिका निभा रही हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि यह प्रोजेक्ट और मेरी भूमिका दोनों को पसंद किया जाये, जितना कि मेरी नेगेटिव भूमिकाओं को किया गया है।

सवालः ‘बीचवाले’ में दर्शकों के लिये क्या है?
‘बीचवाले’ एक कॉमेडी शो है, जिसकी पृष्ठभूमि काफी वास्तविक है। आप अतिश्योक्ति या पारंपरिक, भड़कीला किरदार नहीं पायेंगे। ये किरदार विश्वसनीय लगते हैं। यही एक ऐसी चीज है जो ‘बीचवाले’ की अलग और नई है। यह बहुत ही नई तरह की कहानी है।

सवालः एक महिला या बीचवाला/मध्यमवर्गीय होने के कारण आपको रोजमर्रा के जीवन में किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा है?
एक महिला होने के नाते आज के दौर की महिला जिस तरह की परेशानी का सामना करती है मैंने सारी परेशानियों का सामना किया है- भेदभाव से लेकर असुरिक्षत महसूस होने और तानाशाही सहने तक। एक बीचवाले के रूप में समाज, राजनीति, रिश्ते, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, मनोरंजन- ये सभी चीजें बीचवाले के रूप में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। ये सारी चीजें मुझे भी प्रभावित करती हैं।

सवालः आपका किरदार हमेशा दिखावे या फिर महंगी चीजें चाहती है, व्यक्तिगत रूप से आज तक आपने सबसे लक्ज़री चीज क्या खरीदी है?
आमतौर पर मैं दिखावा नहीं करती हूं। यह मेरा स्वभाव है। मैं जब भी चीजें खरीदती हूं, वे चीजें मेरी जरूरत की होती हैं, बेवजह कुछ भी नहीं होता। मैं ज्यादातर कॉस्मैटिक्स खरीदती हूं क्योंकि मुझे उनकी जरूरत होती है और शायद यह चीजें मुझे अच्छी लगती हें। मुझे याद नहीं है कि मैंने कोई सबसे महंगी चीज खरीदी हो…शायद वह सनग्लासेस हो सकते हैं।

सवालः आप किस गांधीवादी विचारधारा को मानती हैं?
शांति बनाये रखने, खुद की रक्षा और अपने पर्यावरण की सुरक्षा के गांधीवादी सोच को मैं सबसे ज्यादा मानती हूं। डॉ. डेसाकू इकेडा के नेतृत्व में निचेरन बौद्ध धर्म का मैं अभ्यास करती हूं, ऐसा करने से मुझे काफी मदद मिली है।

सवालः आपने कुछ एपिसोड्स की शूटिंग दिल्ली में की है, राजधानी में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?
हमने जो कहानियां की हैं और जो करेंगे वह काफी विश्वसनीय और जीवन से जुड़ी हुई हैं, इसलिये ये कहानियां, किरदार- ये सभी काफी वास्तविक हैं और उनमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। इसलिये, उसमें काफी नयापन होने वाला है। कॉमेडी अतिश्योक्ति, भड़कीले किरदारों और अविश्वसनीय कहानियों का पर्याय होता है। इस शो में ऐसी चीजें नहीं हैं। साथ ही हरेक कहानी में जान है। हर कहानी कॉमेडी से सजी है, जिसमें मुख्य रूप से सामाजिक मुद्दों को दिखाया गया है। यह कॉमेडी के लिये एक अच्छा मंच है- जहां सामाजिक मुद्दों के साथ हल्की-फुलकी चीजें शामिल हैं। यह दर्शकों के लिये बहुत भारी-भरकम नहीं बनाया गया है और साथ ही इसमें ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे दिखाये गये हैं, जिससे आम पुरुष या महिला जूझते हैं।