श्रावण की पहली सवारी निकली

भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावण की पहली सवारी महाकाल मंदिर से प्रस्थान कर जैसी ही रामघाट पहुँची, चारों ओर श्रद्धा और उल्लास का वातावरण छा गया। श्रावण में अपने सौन्दर्य की छटा बिखेरते हुए स्वयं प्रकृति भगवान श्री महाकाल का स्वागत करने के लिए आतुर थी। भगवान की पालकी रामघाट पर जब पूजन-अर्चन के लिए पहुँची तो सूर्यास्त के समय मोक्षदायिनी मां शिप्रा के पावन जल से भगवान श्री महाकाल का जलाभिषेक कर उनके चरण पखारे गए। सूर्य की असंख्य रश्मियों का प्रतिबिम्ब शिप्रा नदी के जल से होता हुआ भगवान की पालकी पर पड़ रहा था, जो उनके सौन्दर्य में अभिवृद्धि कर रहा था। चारों ओर से जय श्री महाकाल का उद्घोष हो रहा था।

भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन और जलाभिषेक मुख्य पुजारी श्री आशीष गुरु द्वारा किया गया। भगवान महाकालेश्वर मनमहेश के स्वरुप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए शिप्रा तट पर पहुँचे थे। लगभग 30 मिनिट तक चले पूजन-अर्चन में भगवान श्री महाकालेश्वर की षोड़शोपचार से पूजा की गई। इसके पश्चात शिप्रा नदी के जल से भगवान का ‍अभिषेक किया गया। इस दौरान पंडित शैलेन्द्र शर्मा, पं. आनन्द जोशी, पं. संजय जोशी, पं. राजेश त्रिवेदी एवं अन्य पुरोहित मौजूद थे। पूजन के पश्चात पुरोहितों द्वारा रुद्रपाठ किया गया। दत्त अखाड़े से परम्परानुसार भगवान श्री महाकालेश्वर की पूजा की थाली आई और अखाड़े के प्रतिनिधियों द्वारा भगवान की आरती की गई।

इस दौरान रामघाट पर संभागायुक्त श्री एम.बी. ओझा, आई.जी. श्री राकेश गुप्ता, डी.आई.जी. श्री रमणसिंह सिकरवार, कलेक्टर श्री मनीष सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री सचिन अतुलकर सहित पूरा प्रशासकीय अमला मौजूद था। प्रशासन की ओर से पूरी चाक-चौबन्द व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता से भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के दर्शन हो सकें। प्रशासकीय अमले के साथ–साथ घाट पर श्री बहादुरसिंह बोरमुंडला, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री महेश परमार, स्थानीय पार्षद श्रीमती माया राजेश त्रिवेदी, प्रात: भस्मार्ती के प्रमुख पुजारी श्री गणेश पुरी अन्य जन प्रतिनिधि और भारी तादाद में आमजन मौजूद थे।  पूजन-अर्चन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर की आरती की गई। इसके पश्चात  पुलिस दल द्वारा भगवान की पालकी को सलामी दी गई और पालकी अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए श्री महाकाल मंदिर की ओर रवाना हुई।