‘जन आशीर्वाद यात्रा’ नहीं ‘जन क्षमावाणी यात्रा’ निकाले शिवराजः सिंधिया

उज्जैन (नईम परवेज)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में महिलाओं और छोटी बच्चियों से बलात्कार बेरोजगारी और दलित,आदिवासी उत्पीड़न की घटनाओं में कथित इजाफे के कारण मुख्यमंत्री को ‘जन क्षमा.याचना यात्रा’ निकालनी चाहिये।

प्रदेश कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने यहां उज्जैन में पत्रकारवार्ता में कहा शिवराज अपने सार्वजनिक वक्तव्यों में अक्सर खुद को पिछड़ा बताते हैं। लेकिन वह सुन लें कि मुख्यमंत्री पद की कोई जाति या धर्म नहीं होता। मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री सूबे की साढ़े सात करोड़ जनता का प्रतिनिधि होता है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रदेश में इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये मुख्यमंत्री पद का चेहरा अब तक घोषित नहीं किया है। सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से प्रमुख विपक्षी दल को लगातार चुनौती दी जा रही है कि वह इस पद पर दावेदारी के लिये अपने किसी नेता को शिवराज के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारकर दिखाये।

इस बारे में पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा भाजपा को हमारे बारे में चिंता करने की बजाय अपना घर संभालना चाहिये। शिवराज को केवल अपनी कुर्सी की फिक्र है। लेकिन हम सत्ता के लिये लालायित नहीं हैं और हमें केवल जनता की चिंता है।उन्होंने कहा फिलहाल सूबे की साढ़े सात करोड़ जनता ही हमारा चुनावी चेहरा है।

प्रदेश कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने कहा कि वह इसके पक्ष में हैं कि पार्टी को 40 से 50 प्रतिशत टिकट विधानसभा चुनावों के डेढ़ से दो महीने पहले बांटने चाहिये। बाकी चुनावी टिकटों को सिलसिलेवार तरीके से चुनावों से एक महीने पहले घोषित किया जाना चाहिये।

सिंधिया ने यह भी कहा कि कांग्रेस में 30 प्रतिशत चुनावी टिकट ऐसे चेहरों को दिये जाने चाहिये जो जीत सके और जिन्होंने पहले कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा हो। लेकिन इन नेताओं की स्थानीय निकायों या जिला पंचायतों आदि में चुनावी पृष्ठभूमि रही हो।

सिंधिया ने कटाक्ष किया, “पिछले आम चुनावों से पहले मोदी कहते थे कि विदेशों से काला धन वापस लाकर हर देशवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा किये जायेंगे। लेकिन उनकी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ऊंची दरों वाली कर वसूली से पिछले चार साल में जनता की जेब से करीब 15 लाख करोड़ रुपये निकाल लिये हैं।”

उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में इजाफे को “चुनावी छलावा” करार दिया। इसके साथ ही, आरोप लगाया कि ये दाम उचित फॉर्मूले के आधार पर तय नहीं किये गये हैं और इनसे धान व अन्य फसलें उगाने वाले किसानों को उनके पसीने का सही मोल नहीं मिल सकेगा।