जीवन की कुंठाओं को खोलना ही सार्थक साहित्य : श्री रमेश दवे

उज्जैन। जीवन की कुंठाओं को खोलना ही सार्थक साहित्य है और साहित्य में कविता, हमारे जीवन के अनुभवों में अभिव्यक्त होने वाली नदी की तरह है। कविता के शब्दों से ज्यादा उसकी अंतरध्वनियों को पढ़ा जाना चाहिए। उक्त उद्गार सरल काव्यांजलि संस्था के तत्वावधान में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शशिमोहन श्रीवास्तव के काव्य संग्रह ‘क्षण जो जी लिएÓ के विमोचन प्रसंग पर ख्यात साहित्यकार श्री रमेश दवे (भोपाल) ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कविता स्वभाविक चेतना की तरह कवि के अंदर से प्रस्फुटित होना चाहिए। राष्ट्रकवि स्व. श्रीकृष्ण सरल जन्मशती वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के पूर्व कुलपति डॉ. मोहन गुप्त ने कहा कि अपने पिता के उदार आचरण के बीज शशिमोहनजी में आए हैं। पुस्तक समीक्षा करते हुए समालोचक श्री अशाके वक़्त ने कहा कि पुस्तक को दादी माँ, माता-पिता को समर्पित करने के भाव ने मुझे गहरे तक प्रभावित किया है, अपनी रचनाओं में श्रीवास्तवजी ने साम्प्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता को रेखांकित किया है। समीक्षक, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कवि के सहृदय और आस्वादक होने पर जोर देते हुए ‘क्षण जो जी लिएÓ की रचनाओं को दोनों के बीच सेतु बनाने की सफल चेष्टा बताया। उन्होंने कहा कि श्रीवास्तवजी की रचनाएँ मध्यमवर्गीय समाज की विडम्बनाएँ लिए हुए चिंतन परक हैं। डॉ. प्रमोद त्रिवेदी ने कहा कि कविता, पाठक, श्रोता को बेचैन कर दें तो ही उसकी सफलता है, हम जो कुछ लिखेंगे, सच के आसपास पहुँचने की कोशिश करेंगे। प्रारंभ में सरस्वती वंदना के साथ श्री श्रीवास्तव की दो कविताओं का सस्वर पाठ श्री प्रतीक सोनवलकर ने कियाा। गीतकार सूरज उज्जैनी ने कविता सुनाई। विमोचन के पश्चात् श्री शशिमोहन श्रीवास्तव ने अपनी कुछ रचनाओं का पाठ किया, भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति श्री रवीन्द्र कान्हेरे एवं डॉ. नलिनी रेवाड़ीकर ने भी शुभकामनाएँ दीं। अतिथि स्वागत श्री पीयूष श्रीवास्तव, नितिन पोल, संतोष सुपेकर, डॉ. संजय नागर, डॉ. पुष्पा चौरसिया, हरदयालसिंह ठाकुर ने किया। संचालन डॉ. हरिमोहन बुधौलिया तथा आभार श्री परमानंद शर्मा अमन ने माना। इस अवसर पर डॉ. रामराजेश मिश्र (पूर्व कुलपति), डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा, डॉ. शिव चौरसिया, श्रीराम दवे, डॉ. देवेन्द्र जोशी, दिलीप जैन, योगेश व्यास, डॉ. मोहन बैरागी, प्रदीप ‘सरलÓ, आशीष श्रीवास्तव ‘अश्कÓ, विजयसिंह गेहलोत, कमलेश कुशवाह, राजेश राठौर आदि उपस्थित थे।