शासकीय कर्मचारी प्रशासन का दिल, अन्तर आत्मा और हाथ हैं –मुख्यमंत्री श्री चौहान

उज्जैन । शनिवार को उज्जैन प्रवास पर आये प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के विभिन्न 45 संगठनों द्वारा सम्मान एवं आभार प्रकट किया गया। कालिदास अकादमी प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान का विशाल फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। यह समारोह शासकीय कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दिये जाने, केन्द्रीय कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता दिये जाने, अध्यापक संवर्ग को शिक्षा विभाग में सम्मिलन करने तथा सेवा निवृत्ति की उम्र 62 वर्ष किये जाने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद एवं आभार प्रकट करने के लिये आयोजित किया गया।

      इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शासकीय कर्मचारी प्रशासन का दिल, अन्तर आत्मा और दोनों हाथ हैं। प्रदेश के हित के लिये सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों के लिये निरन्तर कार्य किये गये हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को अपने परिवार की तरह समझा है। आगे भी शासन की ओर से निरन्तर कर्मचारियों के कल्याण के कार्य किये जायेंगे। शासकीय कर्मचारी और सरकार मिलकर प्रदेश को समृद्ध और विकसित बनायेंगे।

      मप्र शासकीय तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष श्री रमेशचन्द्र शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि शासकीय कर्मचारियों के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जितना किया है, उतना किसी ने नहीं किया। प्रदेश की सरकार ने हमेशा कर्मचारियों की पीड़ा और समस्याओं को समझा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी वर्गों का समान रूप से ध्यान रखा है और उनके हितों की रक्षा की है। शासन ने कर्मचारियों के लिये जो किया है, वह पूरे देश के राज्यों के लिये प्रेरणा बना है। मुख्यमंत्री द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के विकास के लिये भी कारगर कदम उठाये गये हैं।

      कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री केपी सिंह ने की। संचालन श्री शिव चौबे ने किया। समारोह के संयोजक श्री दिलीप चौहान थे। इसके अलावा कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि श्री सुल्तानसिंह शेखावत, सर्वश्री संजय सोनी, राजेन्द्र वर्मा, रजनीश दीक्षित, सुधीर नायक, सुभाष वर्मा, विष्णु वर्मा, अमरसिंह परमार, नीलू श्रीवास्तव एवं 45 संगठनों के प्रान्तीय अध्यक्ष मौजूद थे। आभार प्रदर्शन श्री मनोहर गिरी ने किया।

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