कारोबार जगत में परियोजना लागत जानबूझ कर ऊंची दिखाने की बुराई से निपटने में मदद करें लागत-लेखाकार: कोविंद

नई दिल्ली ,  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज लागत – लेखाकारों का आह्वान किया कि वे व्यावसायिक क्षेत्रों में कपटपूर्ण ढंग से परियोजनाओं की लागत ऊंचा दिखाने (गोल्ड – प्लेटिंग) की बुराई से निपटने में देश की मदद करें। उन्होंने कहा के ऐसे लेखाकारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अपव्यय के कारण उत्पादन की लागत ऊंची न हो।

राष्ट्रपति आज यहां भारतीय लागत – लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के रजत जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लागत लेखाकारों को ऐसी प्रणालियों और प्रक्रियाओं का विकास करना चाहिए ताकि अनावश्यक के खर्चों को कम से कम किया जा सके और ‘ खर्च किए गए एक एक रूपया आगे उपयोगी सिद्ध हो। ’ उन्होंने कहा कि ‘ हमारें व्यावसायिक जगत में कभी कभी गोल्ड प्लेटिंग की बुराई दिख सकती है। यह जिम्मेदारी लागत – लेखाकारों की है कि वे इससे से निपटने में मदद करें। ’

कारोबार में सामान्यत : गोल्ड प्लेटिंग ऐसी स्थिति को कहा जाता है परियोजना लागत को ऐसे खर्चों के जरिए ऊंचा दिखा दिया जाता है जो टालने लायक होते हैं। और फिर उस लगत की वसूली उपभोक्ताओं से की जाती है।

समारोह में कंपनी मामलों के मंत्री पी पी चौधरी भी थे ।उन्होंने कहा कि लागत लेखाकारों को कंपनियों को पारदर्शिता और सच्चाई के साथ काम करने का पथ प्रदर्शन करना चाहिए।इससे सभी पक्षों का हित सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि ‘ हमारी अर्थव्यवस्था की लागत प्रतिस्पर्धी रहे। ’

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