भारत के विकास को समावेशी बनाना आवश्यक : कोविंद

नयी दिल्ली , राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि केंद्र सरकार की नौकरियां देश की सेवा के लिए एक ‘‘ विशाल मंच ’’ प्रदान करती हैं और अधिकारियों के लिए देश के विकास को समावेशी बनाना जरूरी है।

कोविंद ने यह बात विभिन्न सिविल सेवाओं के प्रोबेशनरी अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए कही। इंडियन डिफेंस इस्टेट्स सर्विस , इंडियन टेलीकम्युनिकेशन सर्विस और पी एंड टी बिल्डिंग वर्क्स सर्विस के प्रशिक्षु अधिकारी राष्ट्रपति भवन में कोविंद से मुलाकात करने पहुंचे थे।

कोविंद ने प्रोबेशनरी अधिकारियों से कहा कि उनकी संबंधित सेवाएं ‘‘ देश की सेवा करने के लिए एक विशाल मंच ’’ मुहैया कराती हैं। ’’ उन्होंने कहा कि आप अलग .. अलग कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होंगे और रक्षा और दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करेंगे।

उन्होंने कहा ,‘‘ कुछ नौकरियां एक कार्यालय में काम करने का मौका देती हैं जहां वे जो कुछ भी करते हैं वह राष्ट्र की सेवा का एक काम हो सकता है। ’’

कोविंद ने दूरसंचार के बारे में बात करते हुए कहा कि कुल इस्तेमालकर्ताओं को देखते हुए भारत में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है।

उन्होंने कहा , ‘‘ दूरसंचार क्षेत्र में तेज विकास हुआ है , विशेष तौर पर वायरलेस क्षेत्र में और आज इसे बिजली , सड़क और पानी जैसा मूलभूत आधारभूत ढांचा माना जाता है। तेज आर्थिक प्रगति और सामाजिक आर्थिक विकास हासिल करने के लिए यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण घटक है। ’’

उन्होंने कहा , इसलिए इंडियन टेलीकम्युनिकेशन सर्विस अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है क्योंकि हम बिना जुड़े क्षेत्रों , विशेष तौर पर हमारे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ना चाहते हैं।

उन्होंने कहा , ‘‘ हमारे विकास को समावेशी बनाना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना इंडियन टेलीकम्युनिकेशन सर्विस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि हमारे यहां एक सक्षम बनाने वाला नीतिगत बदलाव हो और अनुकूल लाइसेंसिंग और नियामक ढांचा हो। ’’

कोविंद ने कहा कि पी एंड टी बिल्डिंग वर्क्स सर्विस अधिकारियों का काम उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें दूरसंचार विभाग और डाक विभाग में कार्यालय और आवासीय परिसरों के निर्माण और रखरखाव के साथ ही विद्युत और वास्तुशिल्प के काम में गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्वित करनी होती है। ’’