मप्र विधानसभा चुनाव : आप, बसपा, सपा जैसे दलों की मौजूदगी ने बढ़ाई चुनावी जंग की दिलचस्पी

भोपाल,  मध्यप्रदेश में दशकों से भाजपा एवं कांग्रेस ही चुनावी दंगल में आमने सामने रही हैं, लेकिन इस बार बसपा, सपा, जीजीपी, आप और सपाक्स जैसी पार्टियों की मौजूदगी से मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।

प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस जहां प्रदेश में अपना पहले वाला रुतबा हासिल करने और भाजपा से सत्ता छीनने के लिए प्रयासरत है वहीं भाजपा अपना गढ़ बचाए रखने की कोशिश में है। कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ को प्रदेश का मुखिया बनाया है। भाजपा ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदलते हुए जबलपुर से लोकसभा सांसद और संगठन के महारथी राकेश सिंह को प्रदेश की कमान सौंपी है।

प्रदेश में पहली बार चुनावी दंगल में उतरने जा रही आम आदमी पार्टी अपने उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर चुकी है। आप की मप्र इकाई के संयोजक आलोक अग्रवाल ने कहा, ‘‘आगे चरणबद्ध तरीके से आप के उम्मीदवारों की घोषणा की जायेगी।’’

प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की 15 जुलाई को इन्दौर में आमसभा प्रस्तावित है।

शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल :यू: के बागी गुट ने प्रदेश में ‘महागठबंधन’ के गठन के प्रयास तेज दिये हैं। इसके तहत गोंडवाना गणतंत्र पार्टी :जीजीपी: और इससे अलग हुए गुट भारतीय गोंडवाना पार्टी :बीजीपी: जैसे दलों को एक साथ लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

प्रदेश सरकार की रोजगार, पदोन्नति और शिक्षा में आरक्षण की नीति के विरोध से पैदा हुए संगठन सपाक्स : सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी, कर्मचारी संस्था: के संरक्षक और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

आप, बसपा और अन्य दलों का चुनाव में कोई असर न होने का दावा करते हुए भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मध्यप्रदेश में राजनीति सामान्यत: दो मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच रही है। अन्य दलों की मौजूदगी से भाजपा का फायदा ही होगा क्योंकि यह विपक्षी दल कांग्रेस के मतों का विभाजन करेंगे।’’ कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश में दो धुव्रीय राजनीति रही है इसलिये कांग्रेस बसपा और सपा जैसे समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन कर सकती है ताकि वोटों, विशेषकर एसटी,एससी और पिछड़े वर्गो के वोटों का विभाजन रोका जा सके। इस बारे में निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाएगा।’’ आप और सपाक्स के मौजूदगी पर चतुर्वेदी ने कहा कि ये दल चुनाव में कोई असर नहीं डाल पायेंगे।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 230 में से 165 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस को 58 सीटें मिलीं। दोनों दलों को मिले मतों का प्रतिशत क्रमश: 44.48 और 36.38 था। बसपा, सपा और जीजीपी को क्रमश 6.29, 1.25 और एक प्रतिशत मत हासिल हुए थे।