एक तिहाई भारतीयों ने पूरा साल कभी किसी शारीरिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया

नयी दिल्ली,  दो दिन पहले पूरे जोशो खरोश से अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने वालों के लिए एक हालिया शोध में सामने आया यह तथ्य चौंकाने वाला हो सकता है कि एक तिहाई भारतीयों ने पिछले एक साल में कभी किसी शारीरिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया।

इस बात में दो राय नहीं कि बचपन में खेलकूद में जितनी दिलचस्पी होती है, वह बढ़ती उम्र में कम होने लगी है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए प्यूमा और विराट कोहली ने अपने ‘’कम आउट एंड प्ले’’ अभियान के अंतर्गत भारत के 18 शहरों में 18-40 वर्ष के 3924 लोगों पर खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों को लेकर एक शोध किया और इसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।

शोध के बाद यह तथ्य सामने आया कि इसमें भाग लेने वाले लोगों में से एक तिहाई लोगों ने पिछले एक साल में एक बार भी किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया।। वहीं, 57 प्रतिशत लोगों ने पिछले एक साल में कोई खेल एक बार भी नहीं खेला। जबकि 18-21 वर्ष के 70 प्रतिशत लोगों ने पिछले एक साल में कम-से-कम एक बार किसी खेल में हिस्सा लिया। वहीं 36-40 आयु वर्ग के लोगों में, यह आंकड़ा 26 प्रतिशत रहा है। इस अध्ययन से यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि जैसे-जैसे लोग अपने करियर और काम धंधे की तरफ आगे बढ़ते हैं, खेलकूद में भाग लेने का उनका समय और दिलचस्पी घटने लगती है।

खेल और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की बात करें तो इस फेहरिस्त में गोवा 89 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद 58 प्रतिशत के साथ हैदराबाद दूसरे और 57 प्रतिशत के साथ मुंबई तीसरे स्थान पर रहा। वहीं 18 प्रतिशत के साथ गुरुग्राम, 15 प्रतिशत के साथ पटना और 12 प्रतिशत के साथ रायपुर इस सूची में सबसे नीचे रहे।

खेलों और शारीरिक गतिविधियों में रूचि कम होने की वजह के बारे में पूछे जाने पर शोध में शामिल लोगों में से 58 प्रतिशत ने इसका मुख्य कारण समय न होना बताया गया। लेकिन शोध में ये तथ्य भी सामने आया कि समय न होने की वजह बताकर खेलकूद से दूर रहने वाले ये लोग सामान्यत: दिन में 4 से 5 घंटे सोशल मीडिया, टीवी, फ़ोन या मैसेजिंग एप्प पर बिता देते हैं। यहां तक कि एक व्यक्ति एक महीने में औसतन नौ बार सोशल मीडिया अकाउंट पर सामग्री अपलोड करता पाया गया। इससे यह तो स्पष्ट होता है कि लोगों के पास खेल के लिए समय न होने की बात मान्य नहीं है।

यहां यह जान लेना दिलचस्प होगा कि शोध में शामिल जिन लोगों ने खेलकूद में भाग लेने की बात कही, उनमें से 81 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह महज़ मज़े के लिए खेलते हैं। खेलने की दूसरी वजहें खुद को फिट रखना और तनाव से दूर रखना भी है। खेलकूद में हिस्सा लेने वाले 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो अपने घर के नज़दीक ही खुली जगहों पर खेलते हैं और 65 प्रतिशत लोग अपने पड़ोसियों के साथ खेलते हैं। इन दोनों ही आंकड़ों से साफ़ होता है कि साथ खेलने के लिए लोगों की अनुपलब्धता और जगह की कमी खेल खेलने में बाधा नहीं है।

यह बताने की जरूरत नहीं कि स्वस्थ रहने के लिए एक सक्रिय जीवनशैली अपनाना जरूरी है। केवल दिखावे के लिए साल में एक दिन योग कर लेने से बात नहीं बनेगी। यह भी सच है कि कुछ हजार लोगों पर किया गया शोध देशभर के लोगों की जीवनशैली का आइना नहीं हो सकता, लेकिन कुछ हद तक एक संकेत का काम तो करता ही है।