हेलमेट के लिए जन जागरण जरुरी

हेलमेट पहनना अनिवार्य हे ये कानून की बात हे पर व्यावहारिक रूप से इस  कानून को लागु करने में कितनी व्यावहारिक कठिनाइया हे ये चर्चा का एक ज्वलंत मुद्दा हे जिस पर खुले मन से सारी सरकारी एजेंसियों ,सामाजिक संस्थाओ को ,एनजीओ ,और समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति को एक सार्थक पहल कर अतिशिघ्र इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने में और जन जागरण करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए |

राजेश भंडारी “बाबु”

कानून बनाना अलग बात हे और उसको जन जागरण के रूप में लोगो को तैयार करना अलग बात हे | पर ये हमारा का दुर्भाग्य हे की नियम कानून तो बनते हे लेकिन कई कानून ऐसे हे जिनकी जानकारी लोगो तक  अफवाहों या समाचार पत्रों द्वारा पहुचती जो आधी अधूरी होती हे इसलिए हमेशा कानून का पालन नहीं हो पाता और गुनाह करने वाले को गुनाह करने के बाद पता चलता हे की ऐसा भी कानून हे | हेलमेट का भी ऐसा ही हो रहा हे कुछ खबरे प्रकाशित होती हे और रातो रात घटिया किस्म के हेलमेट हजारो की संख्या में बिक जाते हे और कुछ दिनों बाद फिर से वही तीन सवारी और वो भी बिना हेलमेट के |कानून लागु करने का कोई कानून नहीं हे ये सम्बन्धित लोगो की इच्छा पर निर्भर करता हे की कानून लागु करवाये या न करवाए |

नियमो के मुताबिक पुलिस ३०० रूपये का चालान बना सकती हे जो आज कल हर आदमी आसानी से दे देता हे और गुनाह निरंतर रूप से करता रहता हे  | नो प्यूल नो हेलमेट की स्कीम भी कुछ दिन चलती फिर वही स्थिति बन जाती हे अगर कोई नियम बनाया  हे तो उसका पालन भी होना चाहिये पर नियम बनते हे और कुछ समय में उनका कोई नाम लेने वाला भी नहीं मिलता | आजकल  बच्चो द्वारा बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना भी आम बात हे जो दुर्घटना का बड़ा कारण बनते हे ,ऐसे पालको पर भी कार्यवाही होना चाहिए जो अपने बच्चे को ये जानते हुवे भी गाड़ी देते हे जिनके पास लाइसेंस नहीं हे  | सरकारी आकडे और सर्वे क्या कहते हे ये अलग बात हे पर  असली हालत जमीन पर क्या हे ये सब जानते हे तीन सवारी और बिना हेलमेट के चलाना आम बात हे बड़े शहरों में तो और भी कुछ ओपचारिकता हे लेकिन बड़े शहरों से थोडा ही बाहर निकलो तो सही स्थिति पता चलती हे हा कुछ लोग जरुर स्वेच्छा से हेलमेट पहनते हे लेकिन उनकी संख्या बहुत ही कम हे | आये दिन दुर्घटनाए हो रही हे लोग मर रहे हे ,ट्रामा सेंटर का काम लगातार बड रहा हे और जवाबदार लोग महज ओपचरिकता पूरी कर रहे हे |दो पहिया वाहनों की स्पीड को लेकर निर्माता कम्पनियों के नियम के द्वारा नियंत्रित करने की आवश्यकता हे जो स्पीड और फेशन से जोड़कर युवाओ को गुमराह करने  में कामयाब हो रही हे |कम उम्र के बच्चे पावर बाइक चला रहे हे जो सर्वथा अनुचित हे | आज हमे जरूरत हे एक जन जागरण मूवमेंट की जो स्वच्छ भारत अभियान की तरह से पुरे देश में एक जन जागरण कर इन आसामयिक होने वाली मोतो पर रोक लगा सके |