26 सौ वर्ष के शासन का स्थापना दिवस मनाया गया

उज्जैन। जैन समाज द्वारा दिनांक 26 अप्रैल को शासन स्थापना दिवस मनाया गया, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक युवक महासंघ द्वारा इस दिन श्री हिरसुरीश्वर जी बड़ा उपाश्रय मैं साध्वी श्री दमिता श्रीजी, प्रियदर्शना श्रीजी आदि 31 साध्वी वृंद के पावन सानिध्य में ध्वजवंदन, दीप प्रज्वलन, प्रवचन एवं प्रभावना के कार्यक्रम हुए।

महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनोद जी बरबोटा, संजय जी जैन मोटर्स, राजेश जी पटनी, नवीन जी गिरियां, संजय जैन ज्वेलर्स द्वारा ध्वज वंदन किया गया, सभी ने ध्वज गीत के साथ जयकारे लगाये। वीरेन्द्र गोलेचा ने बताया कि प्रात: महासंघ शहर अध्यक्ष रितेश खाबिया के संचालन में धर्मसभा आयोजित की गयी जिसकी शुरुवात प्रदेश अध्यक्ष अजेश जी कोठारी, महेंद्र जी सिरोलिया, रखबचंद जी कंकरेचा प्रकाश जी गांधी, नितेश जी नाहटा, ललित जी कोठारी आदि ने दीप प्रज्वलन कर की। सभी ने सामूहिक गुरु वंदन किया, स्वीटी जैन के मार्गदर्शन में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा शासन प्रभावना नृत्य प्रस्तुत किया गया। शासन स्थापना दिवस का महत्व बताते हुए विनोद जी बरबोटा ने साध्वी वृन्दो की तपस्या की अनुमोदना की, राहुल सरार्फ द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। सभा में संतोष जी कोठारी, दिनेश सोलंकी, अनिल जी कंकेरेचा श्रीपाल राजावत डॉ संजीव जैन, आदि उपस्थित थे।साध्वीवृंद द्वारा सभा में खाराकुआ मंदिर पर दिनांक 2 से 6 मई तक आयोजित पांच दिवसीय कन्या संस्कार शिविर की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें 12 से 30 वर्ष की बालिकाए एवम् युवतियों भाग ले सकती है।

हमारा शत्रु पड़ोसी या घर वाले नहीं बल्कि क्रोध मान और हमारे कर्म है- साध्वी श्री दमिता श्रीजी, प्रियदर्शना श्रीजी, हर्ष प्रज्ञा श्रीजी, प्रियल ज्योति श्रीजी, दिव्यनेहा श्रीजी शासन रत्न श्रीजी ने अपने प्रवचन में शासन स्थापना दिवस के बारे में बताया कि आज से 2600 वर्ष पूर्व 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने शासन की स्थापना की थी। शासन संपत्ति या सत्ता से नहीं बल्कि वैराग्य से चलता है, जब तक साधु-साध्वी है शासन है ओर इसी शासन के कारण महलों में रहने वाले भी पैदल चलने वालों के पैर छूते हैं। हमारा शत्रु हमारा पड़ोसी या घर वाले नहीं, हमारा शत्रु है क्रोध मान और हमारे कर्म, हमें इन से विजय प्राप्त करना है। हम बर्थडे आदि कितने ही डे मनाते हैं वह सब हमारे लिए मनोरंजन डे हैं लेकिन मनोरंथन के लिए शासन स्थापना दिवस है। अगर हमारा एक भव बिगड़ा तो आने वाले सभी भव बिगड़ जाएंगे। आपने बताया कि राजा विजय प्राप्त करने के लिए युद्ध करता है लेकिन परमात्मा ने तीनों लोको पर विजय प्राप्त करने के लिए एक भी युद्ध नहीं किया उन्होंने परम शांति का मार्ग अपनाया वही मार्ग हमें भी अपनाना है, जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करते हैं उसी प्रकार जैनम जयति शासनम् के लिए अपने आप को चार्ज करना जरूरी है।