शुभ सुकून का अहसास कराती टीसीएस

भारत और यहां की संस्कृति, समाज, तकनीक, शिक्षा एवं व्यवसाय एक नये मोड़ पर खड़े हैं। सूचना, ज्ञान, तकनीक एवं शक्ति का एक नया तालमेल, एक नया संतुलन, एक नया समीकरण पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल रहा है। व्यवसाय एवं तकनीक के तालमेल से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) ने एक नया इतिहास रचा है, जो भारत के लिये गर्व और गौरव का विषय है। टीसीएस न सिर्फ देश की सबसे बड़ी कंपनी हो गयी है, बल्कि दुनिया के सौ अरब डॉलर वाले एक्सक्लूसिव कंपनी क्लब में भी जगह बना ली है। पिछले ही साल टीसीएस को दुनिया के तीन सबसे बड़े आईटी सर्विस ब्रांड में शामिल किया गया था। उसे तीसरे साल भी टॉप एम्प्लॉयर इंस्टीट्यूट द्वारा दुनिया के एक सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस स्वतंत्र निकाय द्वारा टीसीएस को अपने विशिष्ट कर्मचारी प्रदायनों के लिए दुनिया के 113 देशों की 1300 से अधिक कंपनियों के समूह में से चुनकर यह प्रमाणन प्रदान किया गया।

ललित गर्ग

टीसीएस ने एक शुभ सुकून का अहसास कराया है। उसने 6827 अरब रुपए के कुल कारोबार के साथ रिलायंस, एचडीएफसी और आईटीसी जैसे बड़े खिलाड़ियों को पछाड़कर अपने लिए वह मुकाम सुनिश्चित कर लिया है, जो फेसबुक, गूगल और ऐपल जैसी कंपनियों के लिए सुरक्षित माना जाता है। टाटा ग्रुप की कुल आमदनी में 85 फीसद हिस्सा रखने वाली टीसीएस पूरी दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर समाधान पेश करती है। 50 से ज्यादा अवॉर्ड जीत चुकी इस 50 वर्षीय कंपनी में अभी तकरीबन 3 लाख 90 हजार लोग काम करते हैं और यह पिछले दो साल से आईटी सर्विस देने वाली दुनिया की तीसरी सबसे अच्छी कंपनी मानी जा रही है। पहले नंबर पर अमेरिका की आईबीएम और दूसरे पर आयरलैंड की एक्सेंचर है।

अब जबकि वैश्विक व्यवसाय ‘पोस्ट-डिजिटल’ युग में प्रवेश कर चुका है- जहां काम की प्रकृति भी बदल रही है। इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बीच इस बदलाव के साथ यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारतीय कर्मचारियों को अगली पीढ़ी के कार्यस्थल में जीवनभर के लिए तैयार करें और उन्हें नए, अत्याधुनिक कौशलों से लैस करें जिनका इस्तेमाल वे आने वाले सालों में कर पाएं। इस दृष्टि से टीसीएस की डिजिटल तकनीक और व्यवसाय दक्षता कार्यक्रमों के जरिए उसकी टीम ने रोमांचक और नवाचारी अनुभव विकसित किए है जिन्हें वे अपने ग्राहकों के प्रासंगिक ज्ञान के साथ उन्हें बेहतर मूल्य प्रदान करने और अंततोगत्वा उन्हें उनके व्यावसायिक चुनौतियों से निबटने में मदद करते हेतु संयोजित कर सकते हैं। इसी के बल पर इस साल टीसीएस को पुनः टॉप एम्प्लॉयर्स ग्लोबल सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया गया जिससे यह दुनिया भर में इस प्रमाणन को हासिल करने वाले गिने-चुने संगठनों में शामिल हो गया है। टीसीएस को यूरोप, एशिया प्रशांत, उत्तर अमेरिका, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व में अपने 27 एकल देशी टीमों के लिए यह नवीनतम टॉप एम्प्लॉयर सम्मान हासिल हुआ है। टॉप एम्प्लॉयर रैंकिंग नौ प्रमुख मानदंडों- प्रतिभा रणनीति, कार्यबल नियोजन, ऑन-बोर्डिंग, शिक्षण और विकास, निष्पादन प्रबंधन, लीडरशिप विकास, करियर और उत्तराधिकार प्रबंधन, मुआवजा तथा लाभ और कंपनी संस्कृति के 600 एचआर कार्यव्यवहारों में गहन अनुसंधान के बाद निर्धारित किया जाता है। प्रमाणन हासिल करने के लिए सभी कंपनियों को एक कठोर अनुसंधान प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है और वांछित उच्च मानक को पूरा करना पड़ता है।

टीसीएस के साथ ही दो और भारतीय कंपनियां इन्फोसिस और एचसीएल भी आईटी सर्विस देने वाली दुनिया की टॉप 10 कंपनियों में शामिल हैं, लेकिन उनकी मार्केट वैल्यू टीसीएस के मुकाबले अभी आधी ही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आईटी सर्विस के मामले में भारतीय कंपनियां दुनिया के शीर्ष पर हैं, लेकिन इसका दूसरा निराशाजनक पहलू यह है कि सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट बनाने के मामले में उनकी गिनती दुनिया की टॉप सौ कंपनियों में भी नहीं होती। ऐसा एक भी भारतीय सॉफ्टवेयर नहीं है, जिसका नाम विंडोज, आईओएस, एंड्रॉयड आदि की सूची में रखा जा सके। देसी बाजार में चलने वाले कुछेक एकाउंटिंग, एंटी वायरस और जन्मकुंडली जैसे सॉफ्टवेयर जरूर हैं, पर उनकी कोई बड़ी पहचान नहीं है। वक्त आ गया है कि टीसीएस और बाकी प्रसिद्ध भारतीय सर्विस कंपनियां प्रॉडक्ट और प्लैटफॉर्म के क्षेत्र में भी हाथ-पैर फैलाएं। आने वाले वर्षों में कुछ नये सॉफ्टवेयर विकसित करके एक और नयी क्रांति का सूत्रपात करें।

भारत की युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से टीसीएस को प्रयास करने हैं, हम अपने सामने जो युवा पीढ़ी देख रहे हैं, उस पीढ़ी के सपनों का रंग काफी अलग है। दरअसल जब से आर्थिक उदारीकरण के नतीजे आने लगे तब से हम एक नई तरह की युवा पौध देख रहे हैं। यह पौध आत्मविश्वास में भी आगे है, लेकिन उससे कई गुना ज्यादा महत्वाकांक्षी भी है। खास बात यह है कि आज की युवा पीढ़ी को सपने देखना भी आता है और उसके पास वह जिद है जो सपनों को शाश्वत बनाती है। टीसीएस को ऐसा धरातल देना होगा जहां भारत की युवापीढ़ी अपने सपनों को आकार दे सके।

एथेंस के शासकों को सुकरात का इसलिए भय था कि वह नवयुवकों के दिमाग में अच्छे विचारों के बीज बानेे की क्षमता रखता था। लेकिन आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो ऐसे शासक हैं जो सुकरात की तरह अपने देश की नयी पीढ़ी में नित-नये विचार रौप रहे हैं। नयी पीढ़ी में उर्वर दिमागों की कमी नहीं है मगर उनके दिलो दिमाग में विचारों के बीज पल्लवित कराने वालेे ‘सुकरात’ की ही तरह के मोदी जैसे लोग भी हमारे पास हैं। व्यवसाय एवं तकनीक के क्षेत्र में भी ऐसे कितने लोग हैं, जो नई प्रतिभाओं को उभारने के लिए ईमानदारी से प्रयास करते हैं? नयी प्रतिभाओं एवं नयी पीढ़ी को संभावनाओं भरे अवसर मिले तो देश का कायाकल्प हो सकता है। हेनरी मिलर ने एक बार कहा था- ‘‘मैं जमीन से उगने वाले हर तिनके को नमन करता हूं। इसी प्रकार मुझे हर नवयुवक में वटवृक्ष बनने की क्षमता नजर आती है।’’ आज टीसीएस को मिली सफलता और उसके वटवृक्ष बनने में नवयुवकों की क्षमता एवं योग्यता का सर्वाधिक योगदान है। यही पीढ़ी भारत का गौरव बढ़ा सकेंगी, अपेक्षा है उनको खुला आसमान दिया जाये। संसार की सबसे बड़ी आबादी हमारे यहां युवाओं की है। पचपन करोड़ के आसपास है। भारत के अलावा इस वक्त किसी अन्य देश के पास इतनी ऊर्जावान उत्पादक शक्ति नहीं है। इसका यथार्थ अलग-अलग है। इसके सपने अलग हैं। इसके कर्म विविध हैं। और इसके संकट भी विविध हैं। एक बात सबमें काॅमन है- उनमें हिम्मत है। निराशा नहीं है। ग्लोबल कामनाएं हैं। उन्हें पाने की जिद है। जबर्दस्ती है। उनके लिए कुछ भी कर गुजरने का माद्दा है। वह भविष्यवादी हैं। भारतीय युवा नया नायक है जो आईएएस, आईआईटी, एमबीए, एमबीबीएस, केट, जीमैट की कंपटीटिव तैयारी करता रहता है। वह भी है जो पत्रकार है और टीवी में खबर पढ़ने से लेकर रिएलिटी शो करता है। एक वह भी है जो राजनीति में है एक वह भी है जो राजनीति से परे अ-राजनीतिक है। वह ऐसा युवा है जो उदारीकरण, ग्लोबलाइजेशन और मीडिया मार्केट की बढ़ती ताकत के साथ पैदा हुआ है और आज बीस-पच्चीस साल का है। भारत जिस तरह से विविध है उसी तरह से युवा के चेहरे भी विविध हैं। भारत को एक सक्षम देश बनाने का स्वप्न इस पीढ़ी के बल पर संभव है और किसी भी भारतीय कम्पनी को दुनिया में अव्वल बनाने का माद्दा भी उसी के पास है।