“मध्यम व्यायोग” से हुआ भास् महोत्सव का शुभारम्भ

उज्जैन  | कालिदास अकादमी में सात दिवसीय संस्कृत नाट्य समारोह का शुभारम्भ हुआ | दर्शकों से भरे अभिरंग नाट्य गृह में भास् महोत्सव के अंतर्गत पहले दिन संस्कृत नाटक “मध्यम व्यायोग” का मंचन हुआ |

सात दिवसीय संस्कृत नाट्य समारोह के अंतर्गत सात दिनों तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा संस्कृत नाटकों का मंचन किया जा रहा है | इसी तारतम्य में भास् महोत्सव की प्रथम संध्या संस्कृत नाटक “मध्यमव्यायोग” के नाम रही | दर्शकों से भरे कालिदास अकादमी के अभिरंग नाट्य गृह में दीप प्रजल्वन के बाद नाटक का मंचन किया गया | संस्था सचिव महेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशिमोहन श्रीवास्तव,कालिदास अकादमी की निदेशक प्रतिभा दवे,वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाट्य समीक्षक अशोक वक्त ने महाकवि भास् पर अपने वक्तव्य दिए | इसके बाद भास् सांस्कृतिक एवं सामजिक संस्थान की प्रस्तुति मध्यम व्यायोग की प्रस्तुति हुई जिसके निर्देशक महेश शर्मा थे | नाटक में सूत्रधार युवराज सिंह चावड़ा,ब्राह्मण सूर्यदेव ओल्हन,ब्राह्मणी दिशा भटनागर, पुत्र वैभव परमार,युक्तेश गेवराईकर,ऋषि योगी,घटोत्कच ईशान मेनन,भीम शुभम मिश्रा,हिडिम्बा कुमकुम प्रजापत थे वहीँ संगीत संयोजन शैलेन्द्र चौहान,रूपसज्जा पंकज आचार्य,प्रकाश संयोजन राजेंद्र चावड़ा,वस्त्र विन्यास नंदन चावड़ा और सञ्चालन शैलेन्द्र वर्मा का रहा |

नाटक में भीम के पुत्र घटोत्कच द्वारा एक ब्राह्मण परिवार को अपनी माता के भोजन के रूप में ले जाने और फिर भीम द्वारा ब्राह्मण परिवार की रक्षा कर घटोत्कच और उसकी माता हिडिम्बा से मिलन की कथा की अद्भुत प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा | अगली प्रस्तुति में आज संस्कृत नाटक कुमारसम्भवम का मंचन किया जाएगा |