बाबा साहेब आंबेडकर का जीवन राष्ट्रीयता की प्रेरणा से भरा हुआ था

उज्जैन। बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती मनाना ठीक वैसा ही है जैसे गिरीराज जी महाराज की पूजा से पूरे पर्वत की आराधना पूरी हो जाती है। बाबा साहेब आंबेडकर उसी गिर्राज जी की प्रतिमा है जिनकी पूजन से समाज उत्थान एवं राष्ट्रीय जन जागरण करने वाले कई महापुरुषों का पूजन स्मरण हो जाता है। उक्त विचार सामाजिक सद्भाव समिति उज्जैन द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव सम्मेलन एवं डॉ. आंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के सामाजिक समरसता संयोजक संयोजक प्रमोद झा ने व्यक्त किए। आपने बताया कि बाबासाहेब आंबेडकर ने अनगिनत कष्ट और उपेक्षा सहन करने के बाद भी अन्य मजहब एवं मतावलंबियों द्वारा दिए गए प्रस्तावों एवं प्रलोभनों को अनदेखा कर सनातन संस्कृति के तत्व बौद्ध धर्म को अपने अनुयायियों के साथ अपनाया। श्री झा ने संघ द्वारा अपनाई गई अनूठी पद्धति को बताया जिसमें छुआछूत और जातिगत व्यवस्था का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सभी को भारत मां की संतान  हिंदू इस रूप में एक हैं और हिंदू समाज को तोड़ने वाले षड्यंत्रों से सावधान रहकर संगठित समाज के लिए प्रयासरत रहना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे  रामानुज कोट  के पीठाधीश्वर श्री  रंगनाथाचार्य जी महाराज ने भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता की विशेषता को समझाया। आपने कहा कि श्री अंबेडकर जी का   प्रेरक जीवन अपने समाज को एकजुट कर राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित था। आपने उपस्थित  श्रोताओं से राजनीतिक और निजी स्वार्थ से उपजे हिंदू समाज को  तोड़ने वाले षड्यंत्रों से सतर्क रहने का आह्वान किया। समिति के कुल दीपक जोशी जी ने बताया किमंचासीन सभी परम पूजनीय संतो महंतों यथा महंत पर्वत दास साहेब गादीपति श्री सद्गुरु कबीर मुक्तिधाम, योगी पीर राम नाथ जी महाराज गादीपति महंत भर्तृहरि गुफा, स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज पीठाधीश्वर रामानुज कोट, महंत दिग्विजय दास जी महाराज, दिगंबर अखाड़ा, शीतला माता गौशाला, महंत महेश दास जी महाराज, निर्मोही अखाड़ा, चरण सिंह चरणजीत सिंह जी गिल ग्रंथि गुरुद्वारा दशमेश दरबार, महामंडलेश्वर रामेश्वर दास जी महाराज आदि का सम्मान एवं अभिनंदन भावसार, सेन, बधाई, वाल्मीकि, ब्राह्मण, बैरवा, महाराष्ट्रीयन, सिख, स्वर्णकार, जायसवाल, रविदास, अग्रवाल, क्षत्रिय आदि विभिन्न समाजों के प्रमुखों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत वाल्मीकि, अग्रवाल, ब्राह्मण, सेन, भावसार, सिख, क्षत्रिय आदि समाज की महिलाओं ने विभिन्न रंगों की साड़ियों में पधार कर संपूर्ण राम घाट पर सुंदर एवं आकर्षक रंगोलियां बनाई। महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा संत कबीर एवं मीराबाई के भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी गई। उसके पश्चात 210 0 दीपों द्वारा मां क्षिप्रा की सभी समाज जनों ने आरती की। बंगाली समाज की महिलाओं द्वारा बंगाली वेश में ही शंख ध्वनि की गई कार्यक्रम के समापन में सभी समाज जनों ने सिख समाज के निमंत्रण पर गुरु नानक घाट गुरुद्वारे के लंगर में एक साथ भोजन प्रसादी ग्रहण की। कार्यक्रम की जानकारी सामाजिक सद्भाव समिति उज्जैन के संयोजक जसविंदर सिंह ठकराल ने प्रदान की।

Leave a Reply