जश्न-ए-बहार : उर्दू अदब की खुशबू से फिर महका सारा आलम

नई दिल्ली,  शाम का वक्त था, अंधेरा होने को था, मौसम सुहाना था और अचानक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक गोश से उर्दू की खुशबू उठी और पूरा आलम महक गया।

मौका था जश्न-ए-बहार का, सालाना मुशायरा जिसमें छह मुल्कों से आए शायरों ने अपने कलाम पेश किए। देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रोशनी में इन शायरों ने जिंदगी के खुरदरे फलसफे, सियासत, मौजूदा हालात, कौमी एकता से लेकर इश्क और मोहब्बत पर अपनी बात कही।

भारत सहित छह देशों के शोरा-ए-इकराम के अशार, गज़लेa और नज़्में सुनने के लिए आम लोगों के साथ देश की सियासी और समाजी जगत की जानी-मानी हस्तियां भी पहुंचीं।

मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि कुछ लोग मुशायरों की मुखालफत करते हैं, लेकिन उर्दू को जिंदा रखने में मुशायरों ने अहम किरदार अदा किया है।

उन्होंने कहा कि भारत बहुत विविध है, इस सब के बाद भी हम सांस्कृतिक तौर पर एक हैं और यही इसकी खूबी है।

कार्यक्रम शुरू होने के कुछ वक्त बाद पहुंचे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के मौजूदा हालात को लेकर केंद्र सरकार पर बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘आज के दौर में जब सोचने तक पर पाबंदी है, त ब हम जश्न और बहार की बात कर रहे हैं। आज के दौर में इसकी बहुत जरूरत है। हमें अपनी फ्रिज में क्या रखना यह हमें तय करना चाहिए सरकार को नहीं। मुल्क बहुत मुश्किल हालात से गुजर रहा है, इसलिये शायरों से उम्मीद है कि वो ऐसी बात बोलें जो लोगों को सोचने पर मजबूर करे।’

वहीं कथक गुरु बिरजू महाराज ने उर्दू को भावनाओं की जबान बताया और अपने तजुर्बे साझा करते हुए कुछ शेर भी सुनाए।

उन्होंने कहा कि मुशायरा जश्न -ए-बहार 20 बरस से हमारी गंगा जमनी तहजीब की पैरवी कर रहा है।

इस मुशायरे में वाशिंगटन से डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला, न्यूजर्सी से फरहत शहजाद, टोरंटो से डॉ. तकी आब्दी, ओसाका से प्रोफेसर सो यामाने, ढाका से जलाल अजीमाबादी और जेद्दा से उमर सलीम अल एदरूस ने अपने कलाम पढ़े।

भारतीय शायरों की फेहरिस्त में प्रो. वसीम बरेलवी, मंसूर उस्मानी, पॉपुलर मेरठी, शबीना अदीब, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, गौहर रजा, दीप्ती मिश्रा, इकबाल अशहर, मंजर भोपाली, प्रो. मीनू बख़्शी, रेहाना नवाब, लियाक़त जाफरी और हुसैन हैदरी के नाम शामिल हैं। मशहूर शायर मंसूर उसमानी ने जश्न-ए-बहार की निजामत की।

इस मौके पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, कांग्रेस नेता शकील अहमद, मीम अफजल,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ले जनरल ज़मीरुद-दीन शाह समेत सियासी, समाजी, शिक्षा और पत्रकारिता जगत के कई जाने माने नाम पहुंचे।

मंजर भोपाली ने कौमी एकता पर ‘प्यार के कटोरे में गंगा का पानी’ के साथ दिल को छू लेने वाला एक गीत सुनाया।

वहीं लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने भी कौमी एकता से ही अपने कलाम की शुरुआत की। शायर गौहर रजा ने ‘जब सब कहें खामोश रहो’ पर अपनी नज्म सुनाई।

नौजवां शायर हुसैन हैदरी ने भारतीय मुसलमानों के दीगर फिरकों में बंटे होने को लेकर अपनी नज्म सुनाई।