मुद्रास्फीति चिंताओं पर रिजर्व बैंक के नीतिगत दर में कटौती को लेकर विशेषज्ञों का मिलाजुला रुख

मुंबई ,  खाद्य कीमतों में कमी से मार्च में मुद्रास्फीति घटकर 4.3% पर आने के बावजूद विशेषज्ञ भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत दरों में कटौती को लेकर असमंजस में हैं , क्योंकि निकट भविष्य में उन्हें महंगाई के बढ़ने की चिंता है।

अमेरिका की ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि मुद्रास्फीति की नरमी संबंधी रिजर्व बैंक के अनुमान में ही संभावना जतायी गयी है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई बढ़ सकती है।इसके परिणाम स्वरूप अक्तूबर – दिसंबर के बीच रिजर्व बैंक की नीतगत दरों में ‘ हल्की वृद्धि ’ भी दिख सकती है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि हमें आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के बढ़ने की उम्मीद है। खाद्य मुद्रास्फीति के आधार प्रभाव के प्रतिकूल होने और मकान भत्ते के लागू किए जाने की प्रक्रिया के दोहरे प्रभाव से जून में मुद्रास्फीति अपने एक ऊंचे मुकाम पर पहुंच सकती है।

इसी तरह रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की शोध इकाई ने कहा कि उसे अगले छह महीनों में रिजर्व बैंक के किसी तरह नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद नहीं दिखती। यदि रिजर्व बैंक द्वारा बताए गए जोखिमों में बढ़ोत्तरी होती है तो हां , इसमें ( दर ) हल्की वृद्धि जरूर हो सकती है।

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