लड़कियों को आजादी देने की आवश्यकता : राष्ट्रपति

चंडीगढ़, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज माता-पिता द्वारा बेटियों को आजादी और प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत को रेखांकित किया ताकि पुरुषों के प्रभाव वाले समाज में वे नयी ऊंचाइयों पर पहुंच सकें।

कोविन्द ने कहा कि महिलाओं की जिम्मेदारियां उनके रास्ते में अवरोध नहीं बननी चाहिए। उन्होंने प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में बालिकाओं के कम प्रतिशत पर चिंता जताई।राष्ट्रपति कोविंद एमसीएम डीएवी महिला कॉलेज के स्वर्णजयंती समारोह के मौके पर चंडीगढ़ की अपनी पहली यात्रा पर हैं।

उन्होंने कॉलेज में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इस पितृ सत्तात्मक समाज में महिलाएं जीवनभर हर कदम पर समस्याओं का सामना करती हैं। वे इस हालात से कैसे बाहर निकलेंगी? मुझे लगता है कि अगर माता-पिता और परिवार के सदस्य बच्चियों को उनका जीवन जीने की आजादी दें, उन्हें नये क्षेत्रों में अनुभव हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करें तो लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे नयी ऊंचाइयों को छूएंगी।’’

कोविंद ने कहा कि पिछले सप्ताह फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा की फोगाट बहनों ने दिखाया कि कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए निषिद्ध नहीं है। अगर पी वी सिंधु, सानिया मिर्जा, अरुणा रेड्डी, साइना नेहवाल के माता-पिता ने अपनी बेटियों को आजादी, प्रोत्साहन नहीं दिया होता तो उन्हें जीवन में इतनी बड़ी सफलताएं कैसे मिलतीं।’’

महिलाओं की शिक्षा और उनके सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कोविंद ने कहा कि एक शिक्षित बेटी कम से कम दो परिवारों को शिक्षित करती है और उन्हें शिक्षा के महत्व से अवगत कराती है।

समारोह में अपनी पत्नी के साथ शामिल हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चंडीगढ़ की बेटियों की लंबी सूची है जिन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में सराहनीय काम किया है।’’

उन्होंने 1986 में बहादुरी दिखाकर आतंकियों को हराने वाली एयर होस्टेस नीरजा भनोट का नाम भी लिया।