मप्र में उपज के सही मूल्य के लिए ‘मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता योजना’

भोपाल,  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिये ‘मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता प्रोत्साहन योजना’ की घोषणा की है।

राजनीतिक गलियारों में इसे इस साल नवंबर-दिसंबर में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार से नाराज किसानों को लुभाने के लिए उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

चौहान ने कल यहाँ जम्बूरी मैदान में भावांन्तर भुगतान योजना के प्रमाण-पत्र वितरण और कृषि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित किसान महा-सम्मेलन में इसकी घोषणा करते हुए कहा, ‘‘इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2017 में जिस समर्थन मूल्य पर गेहूँ और धान खरीदा गया था, उसमें 200 रूपये प्रति क्विंटल जोड़कर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री द्वारा गेहूँ का समर्थन मूल्य 1735 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जिसे इस योजनांतर्गत प्रोत्साहन राशि जोड़कर 2000 रूपये प्रति क्विंटल किया जायेगा।

चौहान ने कहा कि इसी तरह अगले वर्ष धान में भी मध्यप्रदेश सरकार 200 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि देगी।

उन्होंने कहा कि रबी 2016-17 में समर्थन मूल्य पर 67.25 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का ई-उपार्जन किया गया। इसमें 7.38 लाख किसानों को 1340 करोड़ रूपये का भुगतान होगा। इसी तरह खरीफ 2017 में समर्थन मूल्य पर 16.59 लाख मीट्रिक टन धान ई-उपार्जन किया गया, जिसका 2.83 लाख किसानों को 330 करोड़ रूपये का भुगतान होगा।

चौहान ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना जारी रखी जायेगी।

उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान की भरपाई राहत राशि और फसल बीमा को मिलाकर की जायेगी।

चौहान ने कहा कि इस सम्मेलन में भावांतर राशि के प्रमाण-पत्र वितरित किये गए तथा 3.98 लाख किसानों को 620 करोड़ रूपये की भावांतर राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की गई।

उन्होंने कहा कि किसानों के हित में रबी 2017-18 में चना, मसूर एवं सरसों को भावान्तर भुगतान योजना में शामिल किया जायेगा। इसके अलावा, वर्ष 2018-19 में प्याज की फसल के लिये भावान्तर भुगतान योजना भी लागू की जायेगी।

चौहान ने कहा कि प्रति विकासखण्ड एक हजार कस्टम प्रोसेसिंग एवं सर्विस सेन्टर खोले जाएंगे। किसानों को ही इनका संचालन करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के चंबल संभाग में बीहड़ को कृषि योग्य बनाने के लिये 1200 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे।

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