रण उत्सव से बदली पर्यटन, बंजर गावों की तस्वीर

भुज (गुजरात), गुजरात में 2005 से मनाए जा रहे वार्षिक रण उत्सव से पर्यटन को बढ़ावा मिला है और कभी उपेक्षित से रहे स्थानीय 25 गांवों का आर्थिक परिदृश्य भी बदल गया है।

बंजर भूमि के विस्तार में बसे इन गांवों की सीमा पश्चिम में पाकिस्तान के रेत के टीलों और पूर्व में दलदली तटीय क्षेत्र से होते हुए भुज शहर से लगती है, जो 26 जनवरी 2001 भूकंप में तबाह हो गया था। उस भूकंप में 12,000 लोगों की मौत हुई थी और हजारों की संख्या में लोग जख्मी हुए थे।

पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि इन कम आबादी वाले गांवों की बढ़ते आर्थिक कल्याण को दर्शाती है।

गुजरात पर्यटन के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में 2.23 लाख पर्यटकों ने रण उत्सव की यात्रा की, इसकी तुलना में 2016 में 2.01 लाख लोग इसमें शामिल हुए। इस दौरान 11 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

हर साल एक नवंबर से फरवरी मध्य तक मनाए जाने वाले इस महोत्सव ने करीब 25 छोटे गांवों फिर से जीवंत बनाने में मदद की है। खासकर सांस्कृतिक रूप से समृद्ध उन जनजातियों को भूकंप के बाद बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। हालांकि, इन गांवों के लोग कला के मामले में समृद्ध है और अच्छे कारीगर माने जाते हैं। यह कारीगर अपने सामानों को पर्यटकों को बेचकर आज बेहतर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

इसी तरह का एक गांव है निरोना, जो अपने ‘रोगन कला’ और ‘तांबे की घंटियों’ के लिए जाना जाता है। रोगन कलाकार अब्दुल गफर खत्री ने पीटीआई-भाषा को बताया, “रण उत्सव आयोजन के लिए हम पर्यटन विभाग के आभारी है, जिसने वैश्विक स्तर पर हमारी रोगन कला को लोकप्रिय बनाया और हमारे गांव को पहचान दिलाई।”

उन्होंने कहा, “इस कला को उद्भव 300 साल पहले फारस में माना जाता है और आज यह सिर्फ हमारे गांव में मौजूद है। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और इसने मुश्किल समय में भी हमें जीवित रखा है।”