मनुष्य तन मिलना हमारे लिए सौभाग्य की बात

उज्जैन। वेदों में लिखाहै कि हमें जो मनुष्य तन मिला है यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। जड़ और चेतन दो भागों में बंटा है। बहामाण जड़ पदार्थ का उदय भी है अस्त भी। चेतन का न अंत है ना प्रारंभ। जमीन तैयार करते हैं बीज बोने के लिए। अगर बीज न बोया तो क्या होगा। इसी तरह हम तनाव पैदा कर रहे हैं। प्रकृति में सभी का रिटर्न है। हमारा मस्तिष्क कल्प वृक्ष है। वर्तमान में रहना ही हमारा स्वरूप है। अपने आप को जानना है निर्भयता से मुक्त ही मोक्ष कहलाता है। बहामाण नियम है अनलोडिंग लोडिंग होकर मनुष्य और मशीन दोनों नहीं चल सकते। योग, ध्यान, मुखिया का डर बहामाण के मुखिया का डर होना चाहिए। संसार से डर रहे संसार को बनाने वाले हम नहीं डर रहेहैं। जो दृष्टिगोचर है, वह सांसारिक पूजा है। अनुशासन ही पूजा है। भगवान श्री कृष्ण ने भी राम जी की ही पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि राम नाम ही जपना ईश्वर की पूजा ही करना गुरु द्वरा न की स्वयं की पूजा करना। गुरु देव ने कहा कि कृष्ण पार्वती अवतार है। देवी अवतार है। ईश्वर की प्राप्ति वात्सल्य प्रेम से होगी। पशु पक्षी को भी राम की प्राप्ति हो गई है। कथा के दौरान अतिथि के रूप में सुनीलसिंह, राकेश श्रीवास्तव, बलदेव सिंह शक्तावत, अशोक सिंह गेहलोत, मनोज सिंह, तुषार सिंह, कुलदीपसिंह मौजूद थे। यह जानकारी सुमेरसिंह सोलंकी ने दी।