युवा अपनी प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारने का प्रयास करें – चंकी पांडे

उज्जैन। म प्र शासन, उच्च शिक्षा विभाग के सौजन्य से विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा उत्सव के समापन अवसर पर विभिन्न विधाओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया गया। समापन समारोह के प्रमुख अतिथि सिने जगत के मशहूर अभिनेता चंकी पांडे थे। अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शीलसिन्धु पाण्डेय ने की।

सिने अभिनेता श्री चंकी पांडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि युवा अपनी प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारने का प्रयास करें। रास्ते अपने आप मिल जाएंगे। उन्होंने अपनी लोकप्रिय फिल्मों तेज़ाब, आंखें आदि के संवाद और गीत पेश किए। साथ ही अपनी लोकप्रिय फिल्मों के गीतों पर नृत्य भी किए।

कुलपति प्रो शीलसिन्धु पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि हारने वाले के बिना जीतने वाले का महत्त्व नहीं है। इसलिए सभी की सहभागिता और प्रयास महत्त्वपूर्ण होते हैं। जो आज हारा है वह आगे जीत भी सकता है, इसलिए निरन्तर प्रयास करें। सकारात्मक ऊर्जा से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

विशेष अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री सुनील शुक्ला, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलपति प्रो के एन एस यादव एवं बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो पी के वर्मा थे। इस अवसर पर मेडिकल यूनिवर्सिटी, जबलपुर के कार्यपरिषद सदस्य श्री चंद्रेश शुक्ला और श्रीमती मधुरिमा पाण्डेय विशेष रूप से उपस्थित थीं।

इस अवसर पर अतिथियों ने राज्य स्तरीय युवा उत्सव की बाईस विभिन्न विधाओं तथा सांस्कृतिक शोभायात्रा के विजेताओं को पुरस्कार अर्पित किए। उत्सव में सर्वाधिक पुरस्कार अर्जित करने वाले दल रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर को चलित वैजयंती अर्पित की गई।

प्रारम्भ में विश्वविद्यालयीन कुलगान हुआ। स्वागत भाषण आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो एच पी सिंह ने दिया। आयोजन के सम्बंध में विद्यार्थी कल्याण विभाग के अधिष्ठाता प्रो राकेश ढंड और इंदौर की डॉ जयश्री बंसल ने विचार व्यक्त किए।

अतिथियों को स्मृति चिह्न अर्पित कर उनका सम्मान कुलसचिव डॉ परीक्षित सिंह, आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो एच पी सिंह, विद्यार्थी कल्याण विभाग के अधिष्ठाता प्रो राकेश ढंड एवं अध्ययनशाला छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्य मालवीय ने किया।

संचालन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने किया। आभार कुलसचिव डॉ परीक्षित सिंह ने माना।

सांस्कृतिक संध्या पर नृत्य, संगीत और गायन – वादन की प्रस्तुतियां हुईं

समापन समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या पर शिखर सम्मान से सम्मानित लोक कलाकार श्रीमती कृष्णा वर्मा और समूह द्वारा कानग्वालिया नृत्य, तेजाजी का छतरी नृत्य प्रस्तुत किया गया। प्रारम्भ में उनके समूह ने लोक संगीत की बंदिश सुनाई।

ताल सम्राट नरेंद्र सिंह कुशवाह और समूह द्वारा गैर गायन और विविधायामी ताल वादन किया गया। उन्होंने काँच, मार्बल आदि से स्वयं द्वारा निर्मित डमरू और नगाड़े का वादन भी किया। वन को चले रघुराई तथा बादली रो पानी सैंया मैं बोले रे कुकडू कू का गायन शैलेन्द्र भट्ट ने किया। सिद्धार्थ चौबे के निर्देशन में शुभांगी दवे एवं सिद्धार्थ सागर गुप्ता ने पाश्चात्य शैली में गायन किया। कलाकारों का सम्मान कुलपति प्रो शीलसिन्धु पाण्डेय, श्रीमती मधुरिमा पाण्डेय ने किया। अतिथि स्वागत प्रो एच पी सिंह, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा एवं विद्यार्थी कल्याण विभाग के अधिष्ठाता प्रो राकेश ढंड ने किया। संचालन मयंक शुक्ला ने किया।

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