स्वामी विवेकानन्द जी अलौकिक, अद्भुत विभिूति थे- आशुतोष महाराज

उज्जैन। भारतीय संस्कृति की सुगंध को सम्पूर्ण विश्व में बिखेरने वाले युवा सन्यासी स्वामी विवेकानन्द जी साहित्य दर्शन और इतिहास के प्रकांड विद्वान थे। उनकी स्मरण क्षमता, प्रत्येक विषय के प्रति गहन चिंतन, मनन और उनका जीवन दर्शन उनके अलौकिक व्यक्तित्व से हमारा परिचय कराता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में निरंतर समर्पित रहने के लिये आह्वान किया जिससे वे युवाओं के आदर्श बने।
”स्वामी विवेकानन्द जी-एक अलौकिक व्यक्तित्वÓÓ विषय पर श्री अभिराम आश्रम जयसिंहपुरा उज्जैन पर संस्था गीताश्रीधर धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा संस्थान उज्जैन द्वारा आयोजित परिचर्चा में आश्रम संस्थापक आचार्य श्री आशुतोष  महाराज ने उक्त विचार मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये।
परिचर्चा में अतिथि प्रकाश परमार ने कहा कि परिचर्चाएं महज औपचारिकता नहीं, अपितु परिचर्चाओं द्वारा आज की पीढ़ी हमारे देश के पुरोधाओं के योगदान से रूबरू होने के साथ ही भारतीय सांस्कृतिक विरासत, उपलब्धियों और नैतिक मूल्यों को जीवंत रखने के लिए प्रेरित होती है।
अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष श्रीमती सुमन काबरा ने की। संचालन संस्था उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने किया। आभार संस्था सचिव रूपेश काबरा ने माना। अतिथि के रूप में ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास, अभिषेक नागर, संतोष जैन उपस्थित रहे। इस अवसर पर विकास चौरसिया, सचिन परिहार, श्रीकांत खत्री, लोकेश जैन, प्रकाश मालवीय, विकास जैन, पीयूष काबरा, सौरभ जैन, सुनील माहोर, मयंक नामदेव, रक्षक खत्री, कान्हा परिहार आदि उपस्थित थे। यह जानकारी संस्था सचिव रूपेश काबरा ने दी।

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