स्वयं क्रांतिकारी थे श्रीकृष्ण सरल – डॉ. मोहन गुप्त

उज्जैन। ७ जनवरी को उज्जैन के नागरिक राष्ट्रवाद की जोशभरी धारा में खुलकर बहे। अवसर था, राष्ट्रकवि, अमर शहीदों के ‘चारणÓ स्व. श्रीयुत् श्रीकृष्ण ‘सरलÓ के जन्मशती समारोह का। जानकारी देते हुए संस्था के सरल काव्यांजलि के सचिव डॉ. संजय नागर ने बताया कि स्थानीय सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान के सभागार में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व संभागायुक्त एवं पूर्व कुलपति (पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय, उज्जैन) डॉ. मोहन गुप्त ने कहा कि श्री सरल केवल क्रांति गायक ही नहीं, स्वयं क्रांतिकारी भी थे। उन्होंने अपने काव्य में राष्ट्रवाद के साथ-साथ नारी शक्ति के स्वाभिमान को भी प्रमुखता दी, अंतिम वर्षों में उन्होंने  ‘सरल रामायणÓ रचकर रामकथा को अद्भुत मान्यता दी। कार्यक्रम के अध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ (उज्जैन इकाई) के अध्यक्ष डॉ. हरीश प्रधान ने कहा कि लिखना एक साधना है और सरलजी आजीवन अपनी कलम के द्वारा क्रांतिकारियों की साधना करते रहे। बरेली (उत्तरप्रदेश) से पधारे अविराम साहित्यिकी के प्रधान सम्पादक डॉ. उमेश महादोषी ने कहा कि अत्याचारों का प्रतिकार किसी भी संस्कृति में अवश्यंभावी होता है, इस दृष्टि से सरलजी ने क्रांतिकारियों की कर्मगाथा को अत्याचार के प्रतिकार की तरह महिमा मण्डित किया है, यह किसी भी तरह से हिंसावृत्ति के समर्थन का द्योतक नहीं है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि सरलजी ने ऐसी रचनाएं रची है जिनके बारे में सोचा नहीं जा सकता था। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि सरलजी के उद्देश्य इतने महान थे कि काव्य के अन्य प्रतिमान इसके आगे गौण हो जाते हैं। इस अवसर पर ‘अविराम साहित्यिकीÓ (बरेली उ.प्र.) के संतोष सुपेकर द्वारा संपादित ‘श्रीकृष्ण सरल विशेषांकÓ  का विमोचन एवं ख्यात चित्रकार श्रीकृष्ण जोशी का सम्मान भी किया गया, साथ ही श्री प्रदीप ‘सरलÓ द्वारा श्रीकृष्ण ‘सरलÓ पर केन्द्रित फोल्डर का वितरण भी किया गया।

प्रारंभ में सरस्वती वंदना डॉ. राजेश रावल ‘सुशीलÓ ने प्रस्तुत की। अतिथि स्वागत परमानंद शर्मा ‘अमनÓ, गौरीशंकर उपाध्याय, हरदयालसिंह ठाकुर (एडवोकेट), रमेश जाजू, गड़बड़ नागर, विजयसिंह गेहलोत, आशीष श्रीवास्तव, आशागंगा शिरडोनकर, कोमल वाधवानी आदि ने किया। संस्था अध्यक्ष नितिन पोल ने इंदौर दुर्घटना में मारे गए नौनिहालों के प्रति श्रद्धांजलि के बाद स्वागति भाषण एवं अतिथि परिचय दिया। डॉ. पुष्पा चौरसिया ने अमर शहीद भगतसिंह की माताजी के उज्जैन आगमन की मार्मिक घटना सुनाई। विजय गोपी ने सरलजी की कविता का सस्वर पाठ किया। संचालन संतोष सुपेकर एवं राजेन्द्र देवधरे दर्पण ने किया तथा आभार श्री संजय जौहरी ने माना।
इस अवसर पर श्री प्रदीप सरल, श्रीमती कविता सोनी, डॉ. देवेन्द्र शर्मा, श्री अशोक वक़्त, डॉ. देवेन्द्र जोशी, श्री अशोक भाटी, डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा, श्रीराम दवे, जगदीश पण्ड्या, डॉ. ऊर्मि शर्मा, अरविन्द त्रिवेदी ‘सननÓ, रमेशचन्द्र चंगेसिया (बड़नगर), नृसिंह इनानी, राधेश्याम पाठक ‘उत्तमÓ, प्रतापसिंह सोढ़ी (इंदौर), सरस निर्मोही, प्रभाकर शर्मा, रमेशचन्द्र शर्मा,  डॉ. मोहन बैरागी, एम.जी. सुपेकर, डॉ. रफीक नागौरी, डॉ. गीता नायक, शशिमोहन श्रीवास्तव, शिवदानसिंह सांवरे, अनिल चौबे आदि उपस्थित थे।

Leave a Reply