सार्वजनिक परीक्षा की ध्यान से निगरानी और समीक्षा की जरूरत: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, उत्तर प्रदेश में आठ साल से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी शिक्षकों की भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर रोष प्रकट करते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने की प्रणाली की ध्यानपूर्वक निगरानी और समीक्षा की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (टीजीटी) की भर्ती परीक्षा का विज्ञापन जनवरी 2009 में आने के बाद भी अब तक परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न नहीं होने पर दुख व्यक्त करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की ।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मामले के घटनाक्रम को ‘‘पूरी तरह गड़बड़’’ करार देते हुए उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को निर्देश दिया कि वह अपनी ओर से तैयार परिणाम दो हफ्ते के भीतर प्रकाशित करे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में नवंबर 2015 में आदेश पारित किया था ।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हम इस बात से दुखी हैं कि जनवरी 2009 में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों की भर्ती के लिए आए विज्ञापन के आठ साल बीत जाने के बाद भी परीक्षा की प्रक्रिया संपन्न नहीं हुई है ।’’ पीठ ने कहा, ‘‘सार्वजनिक परीक्षा कराने की प्रणाली की ध्यान से निगरानी और समीक्षा करने की जरूरत है ताकि चयनित उम्मीदवार वर्षों तक चलने वाली मुकदमेबाजी में नहीं फंसें।’’ इस लिखित परीक्षा में 36,000 से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे ।