न्यायिक प्रक्रिया से अलग रह रही पत्नी भी गुजारा भत्ते की हकदार: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया से अलग रह रही पत्नी भी तलाकशुदा पत्नी की तरह ही गुजारा भत्ते की हकदार है और उसे इससे वंचित करने की कोई वजह नहीं है।

शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के 2014 के फैसले के खिलाफ महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने पत्नी को चार हजार रूपए प्रति माह गुजारा भत्ता देने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ पति की याचिका पर यह आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त करते हुये इस मामले पर नये सिरे से विचार के लिये इसे उच्च न्यायालय वापस भेज दिया।

शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पति के वकील ने दलील दी कि महिला गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है और इस मामले में पहले ही न्यायिक अलगाव की डिक्री है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हम इस दलील को सिर्फ अस्वीकार करने के लिये ही रिकार्ड में ले रहे हैं क्योंकि हमें इसमें कोई तत्व नहीं मिला है। यदि तलाकशुदा पत्नी गुजारा भत्ते की हकदार है तो इसकी कोई वजह नहीं है कि न्यायिक तरीके से अलग रहने वाली पत्नी गुजारा भत्ते की हकदार क्यों नहीं होगी।’’ पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं है कि चूंकि निचली अदालत ने ऐसा कोई निष्कर्ष नही दिया है कि महिला अपनी देखभाल करने में असमर्थ है,इसलिए वह गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय को इस सवाल पर गौर करना होगा कि क्या याचिकाकर्ता (महिला) गुजारा भत्ते की हकदार है या नहीं, यदि है, तो गुजारा भत्ते की राशि तय हो।’’ इस महिला के वकील ने न्यायालय से कहा कि उसे पिछले नौ साल से गुजारा भत्ते के रूप में कोई भुगतान नहीं किया गया है।

पीठ ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि याचिका पर फैसला करते समय इस तथ्य को ध्यान में रखा जाये।

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