इंदौर का चिड़ियाघर कूनो-पालपुर अभयारण्य को छह बब्बर शेर देने को राजी

इंदौर, बरसों से बब्बर शेरों की बाट जोह रहे मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य के लिये स्थानीय कमला नेहरू चिड़ियाघर ने मदद की पेशकश की है। चिड़ियाघर प्रशासन ने प्रयोग के तहत अपने छह बब्बर शेरों को कूनो पालपुर पहुंचाने और इन्हें जंगल के माहौल के मुताबिक प्रशिक्षित कराने में रूचि दिखाई है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान से कुछ बब्बर शेरों को मध्यप्रदेश के इस अभयारण्य लाकर बसाने की योजना दोनों प्रदेशों के बीच लम्बी कानूनी लड़ाई के बावजूद परवान नहीं चढ़ सकी है। नतीजतन प्रदेश सरकार को श्योपुर जिले के अभयारण्य में बाघों को बसाने का निर्णय करना पड़ा है।

कमला नेहरू चिड़ियाघर के प्रभारी उत्तम यादव ने आज “पीटीआई-भाषा” को बताया, “अगर हमें सक्षम अधिकारियों की मंजूरी मिलती है, तो हम एक प्रयोग के तहत अपने चिड़ियाघर के दो मादा और चार नर बब्बर शेरों को कूनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य पहुंचाने के लिये तैयार हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे ​​चिड़ियाघर में बब्बर शेरों के प्रजनन कार्यक्रम को अच्छी सफलता मिली है और इनका कुनबा बढ़कर 12 सदस्यों पर पहुंच चुका है। इनमें पांच मादा शामिल हैं।” बहरहाल, सवाल उठता है कि चिड़ियाघर के पिंजरों में जन्मे और पले-बढ़े बब्बर शेर जंगल के एकदम अलग माहौल के मुताबिक ख्रुद को कैसे ढाल पायेंगे। इसके जवाब में चिड़ियाघर प्रभारी ने कहा, “हम वन्य जीव विशेषज्ञों की निगरानी में शेरों को कूनो पालपुर अभयारण्य के किसी सीमित क्षेत्र में शिकार का एक साल का प्रशिक्षण दे सकते हैं। इस प्रशिक्षण के नतीजों के आधार पर उन्हें जंगल में पूरी तरह आजाद करने के बारे में फैसला किया जा सकता है।” यादव ने कहा कि स्थानीय कमला नेहरू चिड़ियाघर द्वारा कूनो पालपुर अभयारण्य को छह बब्बर शेर देने की पेशकश को लेकर वह प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वॉर्डन को जल्द पत्र लिखेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पांच दिसंबर को सम्पन्न राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में फैसला किया गया था कि कूनो-पालपुर अभ्यारण्य में प्रदेश के बाघों को रखा जायेगा।

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