स्वतंत्र फिल्मों के लिए व्यवहार्य विपणन मॉडल की है आवश्यकता – कोंकणा सेन शर्मा

धर्मशाला,  अभिनेत्री से निर्देशक बनी कोंकणा सेन शर्मा का कहना है कि स्वतंत्र सिनेमा का हिस्सा बन वह काफी खुश हैं लेकिन वह जिस प्रकार की फिल्में बनाती हैं उसका वैकल्पिक विपणन रणनीति के बिना सफल होना मुश्किल है।

धर्मशाला में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव’ में 37 वर्षीय फिल्मकार ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘ए डेथ इन द गंज’ प्रस्तुत की।

कोंकणा ने कहा कि छोटे बजट की स्वतंत्र फिल्मों को एक व्यावहारिक विपणन मॉडल तैयार करने की आवश्यकता है ताकि वे भविष्य में बनी रहें।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैं इस क्षेत्र में सहज रहूंगी। मैं खुद को इस दिशा में कुछ बड़ा करते हुए नहीं देखती। मैं छोटा रहना पसंद करूंगी। लेकिन मैं उन लोगों के लिए सार्थक होना चाहूंगी, जो एक ही समय में काफी प्रयास (इस तरह फिल्म को अपना समय देकर) कर रहे हैं। यह तब शुरू होता है जब आप वितरक ढूंढते हैं और पीआर शुरू होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप उन फिल्मों के साथ कैसे मुकाबला कर सकते हैं जिनका बजट काफी बड़ा हो? और इसे गीतों के जरिए किया जाता है, यही फोर्मेट है। लोगों तक पहुंचने के लिए आपकों गीतों का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए हमें गीतों के बिना फिल्म का प्रचार करने के लिए अन्य तरीकों को तलाशना पड़ता है।’’ अभिनेत्री ने यह बयान कल डीआईएफएफ के छठे संस्करण पर ‘द स्टेट ऑफ इंडिपेंडेट्स’ की पैनल चर्चा के दौरान दिया।

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