कुत्तों, पक्षियों के लिए बुरे सपने की तरह है दिवाली

नयी दिल्ली,  दिवाली की रात पटाखों के शोर से बचने के लिए ढाई वर्ष का गोल्डन रिट्रीवर ‘‘जैंगो’’ एक पलंग के नीचे छिप गया और अपने कानों को पंजों से छिपा लिया।

उसके मालिक पुनीत नरूला दक्षिणी दिल्ली के लाजपत नगर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका पड़ोसी ‘हर दिवाली बड़े पैमाने पर पटाखे’ जलाता है, जिससे कुत्तों को बहुत अधिक परेशानी होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘उनकी (कुत्ते) सुनने की क्षमता बहुत तीक्ष्ण होती है और वे पड़ोस में जलने वाले छोटे-से-छोटे पटाखों की आवाज सुन सकते हैं…’’ जैंगो के पास मकान की तीसरी मंजिल पर स्थित नरुला के घर में रहने की सुविधा है लेकिन इलाके के अवारा कुत्तों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसा था क्योंकि आसपास के निवासियों ने देर शाम से मध्य रात्रि तक पटाखे चलाए। नरुला ने कहा, ‘‘जेरी (एक अवारा कुत्ता जिसे नरुला ने शरण दी है) हर रात हमारे परिसर में सोता है। दिवाली के दिन वह छिप गया था। उसने शांति की तलाश में अपने को किसी कार के नीचे या पास के गुरूद्वारे में कहीं छिपा लिया होगा।’’ कुत्तों के लिए काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन की तंद्राली कुली ने कहा कि कई कुत्तों को इस प्रकार से ‘आघात’ लगता है कि उनको सामान्य होने में कई सप्ताह लग जाते हैं। कुछ कुत्ते पटाखों की आवाज से छिपने के लिये बेताहाशा इधर उधर भागने लगते हैं ।

कुली का कहना है कि गली के कुत्तों और पक्षियों को सबसे अधिक नुकसान होता है।

उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘कई पक्षी अंधे हो जाते हैं। शुक्र है कि इस दिवाली मे पशुओं के साथ क्रूरता के मामले हमें अभी तक देखने को नहीं मिले हैं क्योंकि कुछ मौकों पर लोग गली के कुत्तों पर पटाखे फेंकते हैं, जिससे वे जल जाते हैं।’’ कुली ने पटाखों की बिक्री पर उच्चतम न्यायालय की रोक का स्वागत किया और कहा कि इससे ‘उल्लेखनीय परिवर्तन’ देखने को मिला है।

उनके संगठन ‘फ्रेंडीकोज ’ जंगपुरा में एक आश्रय स्थल चलाती हैं जहां 200 से अधिक कुत्ते रहते हैं ।

कुछ पालतू जानवरों के मालिकों ने पीटीआई से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने अपनी बिल्लियों को आलमारी के नीचे छिपा दिया था ताकि वे पटाखों की शोर से परेशान नहीं हों।