2002 दंगे : बड़े षड्यंत्र के आरोप संबंधी जकिया जाफरी की याचिका उच्च न्यायालय में खारिज

अहमदाबाद, पांच अक्तूबर (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2002 के दंगों में बड़े षड्यंत्र के आरोप में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को विशेष जांच दल द्वारा क्लीन चिट दिये जाने को बरकरार रखने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की अपील आज खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी ने बड़े षड्यंत्र के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इसे स्वीकार नहीं किया था।

न्यायमूर्ति गोकानी ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय संजीव भट्ट के मामले में इसपर (बड़े षड्यंत्र) पहले ही चर्चा कर इसे खारिज कर चुका है। मैं उसमें नहीं जाना चाहती, इसलिए मैं बड़े षड्यंत्र संबंधी याचिका को खारिज करती हूं।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले की आगे की जांच के लिए ऊपरी अदालत में जा सकती है।

न्यायमूर्ति गोकानी ने कहा, ‘‘मजिस्ट्रेट का यह कहना सही नहीं था कि आगे की जांच के संबंध में उनके पास सीमित शक्तियां हैं।’’ इस मामले की सुनवायी तीन जुलाई को ही पूरी हो गयी थी।

दंगों में मारे गये पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया और कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के गैर सरकारी संगठन ‘सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ ने एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अदालत में आपराधिक समीक्षा याचिका दायर की थी। मजिस्ट्रेट ने दंगों के पीछे ‘‘बड़ी आपराधिक साजिश’’ के आरोपों के संबंध में मोदी और अन्य लोगों को एसआईटी द्वारा दी गयी क्लीन चिट को सही बताया था।

याचिका में अनुरोध किया गया था कि मोदी और पुलिस तथा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 59 अन्य लोगों को उस कथित षड्यंत्र में संलिप्तता का आरोपी बनाया जाए, जिसके कारण दंगे हुए थे।

इस याचिका में उच्च न्यायालय से मामले की जांच नये सिरे से कराने का आदेश देने का भी अनुरोध किया गया था।

गुजरात के गोधरा में ट्रेन की बोगियां जलाये जाने की घटना के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था, जिसमें कांग्रेस नेता जाफरी सहित 68 लोग मारे गये थे। ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद गुजरात में दंगे हो गए थे।

विशेष जांच दल ने आठ फरवरी, 2012 को यह मामला बंद करने के लिये दाखिल अपनी रिपोर्ट में मोदी और अन्य लोगों को क्लीन चिट दी थी।

दिसंबर, 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने रिपोर्ट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जकिया 2014 में उच्च न्यायालय पहुंचीं थीं।

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