महर्षि वाल्मीक के बिना श्री राम का वर्णन अधूरा है – मुख्यमंत्री श्री चौहान

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को अपने उज्जैन प्रवास के दौरान महर्षि वाल्मीक जयन्ती के अवसर पर शहर के श्री वाल्मीकधाम सिद्धपीठ मन्दिर में महर्षि वाल्मीक की प्रतिमा के दर्शन किये और माल्यार्पण कर पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने वाल्मीकधाम परिसर स्थित सन्त स्वामी श्री सोहनदासजी महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किये और माथा टेका। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने वाल्मीकधाम के संस्थापक सन्त बालयोगी श्री उमेशनाथजी महाराज से उनके आश्रम में भेंट की और आशीष प्राप्त किया।

अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वाल्मीक जयन्ती के पावन अवसर पर यहां आना हुआ है। यह धाम सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में महर्षि वाल्मीक की आस्था का केन्द्र है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम की छवि को मानस पटल पर सदा के लिये अंकित करने वाले महर्षि वाल्मीक हैं। महर्षि वाल्मीक के बिना श्री राम का वर्णन अधूरा है। महर्षि वाल्मीक ने उनके द्वारा रचित रामायण में श्री राम के चरित्र का जो वर्णन किया है वह अदभुत और अविस्मरणीय है। श्री राम के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को आमजन के सामने लाने का श्रेय महर्षि वाल्मीक को ही जाता है। महर्षि वाल्मीक भारतीय संस्कृति और इतिहास के एक दैदीप्यमान सितारे हैं। हम सभी को उनके बताये हुए मार्ग पर चलना चाहिये। मुख्यमंत्री ने समाजजनों को अपनी ओर से वाल्मीक जयन्ती की शुभकामनाएं दीं।

    इस दौरान ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय, उज्जैन दक्षिण विधायक डॉ.मोहन यादव, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, मप्र जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय, श्री अशोक प्रजापत, श्री सोनू गेहलोत, कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक श्री सचिन अतुलकर, नगर निगम आयुक्त डॉ.विजय कुमार जे., एडीएम श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी मौजूद थे। बताया गया कि वाल्मीकधाम में वाल्मीक जयन्ती के अवसर पर देश के अलग-अलग प्रान्तों से आये समाज के लोग एकत्रित हुए हैं। वाल्मीक जयन्ती पर यहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये और वाल्मीक रामायण का भी पाठ किया गया। समाज की ओर से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का स्वागत सर्वश्री रामचन्द्र कोरट, रामप्रसाद सारवान, राजा देवधर, शिव टाकले और महेश बिरोलिया द्वारा किया गया।

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