नदियों से गाद निकालने के मुद्दे पर कानून लाने की संभावना पर राज्यों से विचार विमर्श करेगा केंद्र

नयी दिल्ली, देश में गंगा समेत विभिन्न नदियों में गाद जमा होने की समस्या और इसके कारण गहरी होती बाढ़ की विभीषिका को ध्यान में रखते हुए सरकार गाद निकालने के मुद्दे से निपटने के लिए एक नया व्यापक कानून लाने की संभावना पर राज्यों से विचार विमर्श करेगी ।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एक अधिकारी ने ‘भाषा’ को बताया कि मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक के दौरान कल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नदियों से गाद निकालने के मुद्दे से निपटने के लिए एक नए व्यापक कानून की जरूरत बतायी ।

गडकरी ने कहा कि यह नया कानून राज्यों के परामर्श से तैयार किया जाएगा। देश में बाढ़ की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटना जरूरी है।

अधिकारी ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में गंगा समेत अनेक नदियों में गाद की समस्या आज एक बड़ी चुनौती है । इसके कारण बाढ़ की विभीषिका और भी भयावह रूप ले रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में इस विषय को रेखांकित किया। इस बारे में विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त किये गए हैं जो राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति तैयार करने में मददगार होंगे ।

उन्होंने बताया कि ऐसे सुझाव पर भी विचार किया जा रहा है कि नदी की गाद साफ करने के बाद उससे निकलने वाली मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाए । हालांकि यह अभी विचार के स्तर पर ही हैं । उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पिछले काफी समय से गंगा नदी में गाद की समस्या को उठाते रहे हैं । इस बारे में नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा भी की । केंद्र सरकार ने इस बारे में एक टीम बिहार भेजी थी । इसके अलावा भी विभिन्न विशेषज्ञों ने तलछट प्रबंधन को एक बड़ी समस्या बताया है ।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों में तलछट प्रबंधन के संबंध में एक समग्र नीति बनाने की आवश्‍यकता है क्‍योंकि अगर इसका प्रबंधन नहीं किया जायेगा तो बाढ़ की गंभीर समस्‍या पैदा होगी तथा पर्यावरण, नदी के प्रवाह और नौवहन पर असर पड़ेगा।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने गंगा में गाद की समस्या पर विचार करने के लिये माधव चितले समिति का गठन किया था। समिति ने कुछ समय पहले ही सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी ।

देश में 13 राज्य सूखा की संभावना वाले हैं जबकि 7 राज्य बाढ़ की संभावना वाले हैं ।