गुजरात स्थित ‘सापूतारा’ और ‘डॉन’ को ट्विन ‘हिल स्टेशन’ के रूप विकसित करने की पहल

सापूतारा,  गुजरात में सहयाद्री पर्वतमाला की खूबसूरत वादियों में स्थित ‘सापूतारा और ‘डॉन’ को ट्विन ‘हिल स्टेशन’ के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है और इसे शिमला और चायल की तर्ज पर पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार किया जायेगा ।

गुजरात के पर्यटन मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सापूतारा का शब्दिक अर्थ सांपों का घर है । डॉन क्षेत्र सापूतारा के ठीक सामने की पहाड़ी है जो अधिक ऊंचाई पर स्थित है। गुजरात में यह एक मात्र हिल स्टेशन है। हमारा प्रयास इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से भारत के मानचित्र में प्रमुख स्थल के रूप में स्थापित करना है।

सापूतारा का सांस्कृतिक और धार्मिक और पौराणिक महत्व है क्योंकि यह माना जाता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान कुछ समय यहां बिताया था। डांग क्षेत्र के क्षेत्रीय अभियंता अजीत जोशी ने ‘भाषा’ को बताया कि सापूतारा और डॉन के बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर है । सापूतारा और उससे लगे क्षेत्र में आधारभूत ढांचा समेत अन्य सुविधाओं के विकास के लिये करीब 60 करोड़ रूपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें से 20 करोड़ रूपये की परियोजना का काम पूरा हो गया है ।

उन्होंने कहा कि शेष परियोजना के संदर्भ में प्रस्तुति पूरी हो गई हैऔर अब टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।

उल्लेखनीय है कि ‘डॉन’ सहयाद्री पर्वत श्रृंखला के बीच में स्थित है और यह जंगलों से घिरा इलाका है। कुछ समय पहले स्थानीय प्रशासन और किसानों के सहयोग से 8.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया था । इससे डॉन एवं इससे लगे इलाकों के बीच दूरी कम की जा सकी । डॉन क्षेत्र में एक चोटी है जिसका नामकरण द्रोणाचार्य के नाम पर किया गया है। यहां एक गांव है जिसके बारे में मान्यता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय यहां रूके थे ।

डांग जिला पंचायत प्रमुख बाबूराव चौर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दीर्घ दृष्टि के कारण सापूतारा समेत राज्य के छोटे बड़े सभी पर्यटन स्थल वैश्विक स्तर पर उभर रहे हैं। रोजगार के लिए इस क्षेत्र में पर्यटन प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि सापूतारा और डॉन देश का प्रमुख पर्यटक स्थल बन सकता है क्योंकि यह गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है । ऐसे में इन दोनों राज्यों में आने वाले पर्यटकों के लिये यह स्वत: ही पसंद बन सकता है । बड़ोदरा की पुरातत्चविद सरविना पठान ने बताया कि सापूतारा गुजरात के डांग जिले में स्थित है । सापूतारा एक गांव था जो आदिवासियों का मूल निवास स्थल था । कुनबी, भील, और वारली जनजाति के लोग यहाँ रहते हैं। इन लोगों की मूल भाषा डोंग है। सापूतारा झील को सापूतारा का मुकुट कहा जाता है और डांग फाल्स की अपनी खूबसूरती है।

उन्होंने बताया कि शीत रितू में पर्वतारोहण महोत्सव आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही सापूतारा मानसून त्योहार का अपना ही आकर्षण है। हरीभरी सह्याद्री पर्वत श्रृंखला और वन संसाधन आदिवासी संस्कृति का हिस्सा हैं । त्योहार में काफी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक भाग लेते हैं। इस त्यौहार में आदिवासी संस्कृति, संगीत, नृत्य, कला, खाद्य संस्कृति और साहसिक पर्यटन आकर्षण के केंद्र रहे । स्थानीय कला और शिल्प भी प्रमुख आकर्षण हैं।

सापूतारा समुद्र तल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह डांग जंगल के क्षेत्र में पठार पर स्थित है।