पहाड़ी क्षेत्र के गतिरोध का जल्द समाधान चाह रहा है पर्यटन विभाग

कोलकाता,  दार्जीलिंग का पर्यटन क्षेत्र तत्परता से पहाड़ी क्षेत्र के गतिरोध का जल्द और स्थायी समाधान चाह रहा है। लंबे समय से राज्य के दर्जे के लिए चल रहे आंदोलन के कारण आगामी सीजन में पर्यटक पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले इस स्थान का लुत्फ नहीं ले पाएंगे।

दार्जीलिंग में इस साल गर्मियों में दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया था। लेकिन नौ जून को हुई हिंसा और अलग गोरखालैंड की मांग के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जेजेएम) द्वारा आहूत अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अचानक ही इसे सुनसान शहर में बदल दिया।

जीजेएम संयोजक बिनय तमांग ने कल 12 सितंबर तक पहाड़ी क्षेत्र में बंद के स्थगन की घोषणा की है। इस घोषणा का पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री गौतम देब ने स्वागत किया है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, “हमें उम्मीद है कि पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के हित को देखते हुए, जीजेएम इस बंद को स्थायी तौर पर हटा लेगा। लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं।” उन्होंने माना कि पर्यटकों को वापस यहां लाने के लिए उनमें आत्मविश्वास जगाने में कुछ समय लगेगा।

उन्होंने बताया कि सिक्किम, दार्जीलिंग और दोआर्स तक फैले इस क्षेत्र में तकरीबन छह लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर पर्यटन कारोबार से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा, “जिस प्रकार से गोरखालैंड पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण मुद्दा है, उसी तरह से यात्रा और पर्यटन क्षेत्र भी है क्योंकि उनकी आजीविका इसपर निर्भर करती है। हम बंद के स्थगन का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें खुशी तब होगी जब यह स्थायी तौर पर वापस ले लिया जाएगा। ”