हज के लिए अराफात में जमा हुए दुनिया भर से आए 20 लाख हजयात्री

जबल अराफात,  अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी और हिदायत के लिए दुआ का हाथ आसमान में बुलंद किए दुनिया भर से आए 20 लाख से ज्यादा हजयात्री मक्का के नजदीक जबल अराफात में आज जमा हुए।

सूरज निकलने से ले कर सूरज डूबने तक लाखों लोग रेगिस्तान से घिरी पहाड़ी जबल अराफात में रहेंगे जहां वह इबादत में डूबे रहेंगे। चौदह सौ साल से भी ज्यादा पहले इसी जगह पैगंबर मुहम्मद ने अपना आखिरी खुत्बा (प्रवचन) दिया था। इस खुत्बे को इस्लाम में एक अहम मुकाम हासिल है।

मिस्र से आए 47 साल के हज यात्री खालिद अहमद ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि अल्लाह हमारे गुनाह माफ कर देगा और हमें उम्मीद है कि अपने खुदा की इनायत से हम एक नई शुरुआत करेंगे।’’ अपने आखिरे खुत्बे में पैगंबर मोहम्मद ने मुसलमानों से अपने कर्ज चुकाने, शैतान से बचने, रोजाना पांच वक्त नमाज अदा करने, रमजान में रोजे रखने और खैरात अदा करने को कहा था।

पैगंबर ने इस खुत्बे में लोगों को औरतों के हकों की याद दिलाई थी और कहा था कि सारे कबीले और जातीय समूह बराबर हैं, उनमें कोई ऊंच नीच नहीं है। जो अच्छे काम करेंगे, वे ही अच्छा कहलाएंगे।

उन्होंने संपन्न लोगों से जिंदगी में एक बार हज करने को भी कहा था।

हज के दौरान उम्मीद की जाती है कि हाजी दुनियावी मोह माया से ऊपर उठेंगे, उसके प्रतीकों से अपना नाता तोड़ कर सादगी भरी जिंदगी गुजारेंगे ।

पूरे हज के दौरान मर्द बिना सिला कपड़ा पहनते हैं। औरतें ढीला-ढाला कपड़ा पहनती हैं। वे अपने बाल ढके रहती हैं। वे अपने नाखुनों पर पालिश नहीं लगाती और मेकअप से परहेज करती हैं। अमीर हो या गरीब सब के लिबास एक जैसे होते हैं और सभी एक ही रंग में रंगे दिखते हैं।

तकरीबन एक जैसे सफेद लिबास पहने दुनिया भर के 160 से ज्यादा देशों से हज यात्री मुसलमानों के बीच एकता, सादगी और अल्लाह के सामने बराबरी के प्रतीक के तौर पर देखें जाते हैं।