चोट से उबरने के बाद विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य जीतना खास : साइना

हैदराबाद,  देश की शीर्ष बैडमिंटन खिलाडियों में शामिल साइना नेहवाल ने आज कहा कि करियर को प्रभावित करने वाली चोट से उबरने के बाद ग्लास्गो विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतना उनके लिये काफी खास रहा।

साइना ने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘ पदक जीतना हमेशा खास होता है। अगर यह पदक ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप में आता है तो यह और भी खास है। मैं काफी भाग्यशाली हूं कि 2015 में रजत और 2017 में कांस्य पदक जीत सकी।’’ रियो ओलंपिक के बाद घुटने की सर्जरी करने वाली इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘ मेरे लिये यह पदक काफी मायने रखता है क्योंकि मुझे ऐसी चोट लगी थी जिससे मेरा करियर प्रभावित हो सकता था।’’ उन्होंने अपने फिजियो तथा कोच विमल कुमार की तारीफ करते हुये कहा कि सर्जरी के बाद उनकी मदद से ही वह कोर्ट में वापसी कर पायीं। साइना ने कहा, ‘‘ पिछले साल सितंबर में हुई इस सर्जरी के बाद फिजियो चंदन पोद्दार और अरविंद निगम ने मेरी मदद की। उसके बाद मेरे कोच विमल सर ने मुझे धीरे-धीरे वहां पहुंचने में मदद की जहां आज मैं हूं।’’ पूरी तरह फिट नहीं होने के बाद भी पिछले साल नवंबर में चाइना ओपन से अपने खिताब को बचाने उतरी साइना को पहले दौर में हार कर बाहर होना पड़ा था।

साइना ने कहा, ‘‘ मैंने चीन में टूर्नामेंट में भाग लिया और पहले दौर में हार कर बाहर हो गयी। लेकिन जल्द ही वापसी करते हुये एक सप्ताह बाद मकाऊ ओपन और हांग कांग ओपन में मैने क्वार्टरफाइनल तक का सफर किया। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने मलेशिया ओपन जीता और इंडिया ओपन, इंडोनेशिया ओपन तथा ऑस्ट्रेलिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची। अब विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतना काफी संतोष जनक रहा।’’ लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली इस खिलाड़ी ने कहा कि अगर सेमीफाइनल का कार्यक्रम सही होता तो वह टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली जापान की ओकुहारा को हरा सकती थी। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं ग्लास्गो में पदक जीतने को लेकर आश्वस्त थी। सुंग जी ह्यून के खिलाफ मेरा रिकार्ड 7-2 का है। स्थानीय खिलाड़ी क्रिस्टी गिलमोर को क्वाटरफाइनल में हराने के बाद अगर मुझे ओकुहारा के खिलाफ सेमीफाइनल मैच से पहले आराम मिला होता तो मैं उसे हरा सकती थी। तीन सेट तक चले इस मैच में कम आराम कम मिलने के कारण मुझे हार का सामना कारना पड़ा। लेकिन फिर भी मैं इस पदक से खुश हू।’’