तीन हजार से अधिक मिट्टी के गणेश बनाकर वर्ल्ड रिकार्ड बनाया

आगामी गणेश उत्सव पर्व को धूमधाम से मनाने और इसके साथ ही शिप्रा नदी और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिये “सीखो, सीखाओ और स्वयं बनाओ मिट्टी के गणेश” का संकल्प लिये मंगलवार को चिमनगंज मंडी के प्रांगण में शहर के विभिन्न विद्यालयों से आये बच्चों ने तीन हजार से अधिक मिट्टी के गणेश की मूर्तियां बनाई। इतनी बड़ी संख्या में मिट्टी के गणेश बनाकर उज्जैन का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। यह महाआयोजन लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति द्वारा आयोजित किया गया। बताया गया कि मिट्टी के गणेश की मूर्ति का वितरण समारोह आगामी 25 अगस्त को किया जायेगा। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य “इस गणेश उत्सव जिस रूप में भी करें प्रवेश, मिट्टी के ही हों गणेश” से आमजन को जागरूक करना था। इस दौरान चिमनगंज मंडी के अध्यक्ष श्री बहादुरसिंह बोरमुंडला, संयोजक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, समिति के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्रसिंह अरोरा, सर्वश्री गोविन्द शर्मा, जगदीश पांचाल, रामचन्द्र कोरट, महेश परियानी, वासु केसवानी एवं अन्य नागरिक मौजूद थे।

बताया गया कि पं.दीनदयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सैनानी भी मौजूद थे। मिट्टी के गणेश प्रतिमा बनाने के लिये बच्चों को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। विभिन्न शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के बच्चे प्रतिमा बनाने के लिये मंडी के प्रांगण में मौजूद थे। इनमें सन्त सान्दीपनि हासे स्कूल फाजलपुरा, शासकीय हाईस्कूल फाजलपुरा, शासकीय मॉडल एक्सीलेंस स्कूल शास्त्री नगर, शासकीय कन्या उमावि धानमंडी, वर्जिन मेरी हासे स्कूल मंगल कॉलोनी, सरस्वती विद्या मन्दिर ऋषि नगर, सव्यसांची हासे स्कूल नागझिरी, महर्षि सान्दीपनि हाईस्कूल, शासकीय जीवाजीगंज हासे स्कूल, शासकीय विजयाराजे हासे स्कूल घास मंडी, आलोक हासे स्कूल ढांचा भवन, खालसा हासे स्कूल दूधतलाई, शासकीय कउमावि दशहरा मैदान, शासकीय कउमावि सराफा आदि अन्य विद्यालयों से आये बच्चे मौजूद थे।

बच्चों द्वारा बनाई जा रही मिट्टी के गणेश की प्रतिमा को रिकार्ड बुक में दर्ज करने के लिये एशिया गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के प्रतिनिधि श्री मनीष विश्नोई भी कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने मंडी के प्रांगण में जगह-जगह पहुंच कर बच्चों द्वारा बनाई गई मिट्टी के गणेश की मूर्ति का अवलोकन किया और बच्चों को प्रोत्साहित भी किया। उन्होंने बताया कि उज्जैन के विभिन्न विद्यालयों से आये बच्चों ने बहुत अच्छा काम किया है। सभी के द्वारा बहुत सुन्दर मिट्टी के गणेश की प्रतिमाएं बनाई गई हैं। पर्यावरण और नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिये यह एक बहुत अच्छा कदम है। इस दौरान विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.रामराजेश मिश्र भी मौजूद थे।