स्वतंत्रता दिवस: पतंग उड़ाने की परम्परा अब भी कायम

नयी दिल्ली  स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश भर में लोगों के अपनी छतों पर इकट्टा होना और पतंगों से आसमान का पट जाना आम नजारा है। इस बार भी कुछ अलग स्थिति नहीं है तथा आजादी के दिन कई क्लब पतंग प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही हैं।

काइट क्लब इंडिया,अहमदाबाद के निभुल पाठक ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि उत्तर भारत, विशेषकर दिल्ली, लखनऊ, मुरादाबाद और बरेली में पतंग उड़ाना एक परम्परा है।

पाठक ने कहा ‘‘ संदेश लिखी हुई पतंगें उड़ाना पुरानी परम्परा है। वर्ष 1927 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध जताने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने साइमन, गो बैक’ लिखी पतंगे उड़ाई थीं। पतंगों पर संदेश लिखने का चलन निसंदेह रूप से कम नहीं हुआ है और आसमान में ‘‘ बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’’ के संदेश लिखी पतंगे भी नजर आयेंगी।

पतंगे बेचने के लिए पिछले 20 वर्षों से दिल्ली आ रहे मोहम्मद इमरान ने बताया कि बॉलीवुड और कार्टून पर आधारित पतंगे लोगों के बीच अधिक लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष नई फिल्मों के पोस्टरों और अभिनेताओं वाली पतंगों की मांग अधिक होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस वर्ष आमिर खान की ‘दंगल’ और शाहरुख खान की ‘रईस’ के पोस्टरों वाली पतंगें हैं। हमारे पास बच्चों में सबसे अधिक लोकप्रिय कार्टून चरित्र ‘डोरेमोन’ वाली पतंगें भी हैं।’’ इमरान ने कहा ‘‘500 और 2000 के नोटों की फोटो के साथ पीएम मोदी की तस्वीरें भी कई पतंगों पर मिल सकती हैं।’’ 15 अगस्त को आयोजित पतंग प्रतियोगिता के बारे में मार्डन काइट क्लब के गुफरान मोहम्मद ने कहा कि इस प्रतियोगिता में कई टीमें भाग लेंगी। सामान्यत: प्रतियोगिता में 32 टीमें भाग लेती हैं और हर टीम में सात लोग होते हैं। हर व्यक्ति को 12 पतंगें दी जाती हैं और सभी प्रतिद्वंद्वियों की पतंगों को पहले काटने वाली टीम विजेता होती है।