मध्यप्रदेश सरकार मदद नहीं करती, तो खेलना छोड़ देता : चावला

भोपाल,  मिस्र में 6 रेड विश्व स्नूकर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले कमल चावला ने क्यू खिलाड़ियों को भी सरकारी मदद देने का आग्रह करते हुए आज यहां कहा कि अगर मध्यप्रदेश सरकार सही समय पर उनकी मदद नहीं करती तो वह शायद यह खेल छोड़ देते।

चावला ने स्वदेश लौटने पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘पैसे की कमी के चलते मैं इस खेल को छोड़ रहा था। लेकिन वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया और मेरी वित्तीय सहायता की जिससे मैं खेल में बना रहा। अगर तब सरकारी मदद नहीं मिली होती तो मैं यह खेल छोड़ देता। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार की मदद से मैंने ब्रिटेन में 2011 से 2015 के बीच में कई बार इस खेल की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग ली, जिसके कारण मेरे खेल में काफी सुधार आया है और इससे मुझे मिस्र में हुए 6 रेड विश्व स्नूकर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने में मदद मिली।’’ चावाल ने केन्द्र एवं राज्य सरकारों ने अनुरोध किया है कि वे इस खेल को बढावा देने के लिए देश के शीर्ष खिलाडियों के अलावा अन्य खिलाडियों की भी सहायता करें, ताकि पैसे के तंगी के कारण कोई होनहार एवं उभरते हुए खिलाडी इस खेल को न छोडें।

उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में देश के शीर्ष खिलाडियों को छोड़कर बाकी सभी खिलाडियों को अपने खर्चे पर विदेशों में ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता है और धन के अभाव में वे उच्च स्तरीय ट्रेनिंग नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा, देश में स्नूकर अकादमियों की भी कमी है। चावला ने कहा, ‘‘देश में जल्द से जल्द अन्य शहरों में भी स्नूकर अकादमी खोली जानी चाहिए। स्नूकर खिलाडियों को अतिरिक्त पारितोषिक के साथ ही अन्य खेलों के खिलाडियों जैसे उच्च स्तर के पुरस्कार मिलने चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में केवल एक ही स्नूकर अकादमी है, जो दिल्ली में है।

मिस्र में खिताबी मुकाबले में कमल चावला को वेल्स के गत विजेता डेरेन मोर्गन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस चैंपियनशिप में 53 देशों के 168 खिलाडियों ने भाग लिया था