एशिया प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक चुनौतियां हैं चीन और चरमपंथ : अमेरिका

वाशिंगटन, अमेरिका के एक शीर्ष कमांडर का कहना है कि आक्रामक चीन और हिंसक चरमपंथ एशिया प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकाल में बड़ी चुनौती पेश करते हैं, लेकिन उत्तर कोरिया तात्कालिक और गंभीर चुनौती है।

अमेरिका की प्रशांत कमान (पासकॉम) के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस ने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘सबसे बड़ी चुनौती आक्रामक और स्वयं को आरोपित करने वाला चीन है। लेकिन वर्तमान में तात्कालिक चुनौती उत्तर कोरिया ही है।’’ हैरिस ने कहा कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका सहित सभी देशों के समक्ष मौजूद चुनौती, जिससे हम निपट भी रहे हैं, वे हैं आईएसआईएस और हिंसक चारमपंथी गतिविधियां।

दक्षिणी फिलीपीन के घटनाक्रम पर हैरिस ने कहा कि अमेरिका मरावी शहर पर फिर से नियंत्रण करने के प्रयास में फिलीपीन की सेना की मदद कर रहा है। उग्रवादियों ने इस शहर पर कब्जा कर लिया है और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के खलीफा शासन में अपनी आस्था जतायी है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया में आतंकवाद की क्षमता को लेकर चिंतित हूं।’’ हैरिस ने कहा, ‘‘मैं पिछले सप्ताह अपने इंडोनेशियाई सहकर्मियों से मिला हूं। इसलिए मैं इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण फिलीपीन और बांग्लादेश को लेकर चिंतित हूं। इसलिए मुझे लगता है कि यह अन्य चुनौतियां हैं।’’ अमेरिका प्रशांत कमान का अधिकार क्षेत्र भारत से शुरू होता है और इसमें चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया सहित बाकी एशिया तथा पूरा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र आता है।

गौरतलब है कि पूर्ववर्ती बराक ओबामा तथा मौजूदा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एशिया प्रशांत क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहा है।

Leave a Reply