सीमा पर सेना, बाजार में जनता चीन को खदेड़ेगी

उज्जैन। स्वदेशी अभियान एवं चीनी बहिष्कार मुहिम के पखवाड़े के अंतर्गत शनिवार १२ अगस्त को विभिन्न मोहल्लों से होती हुई प्रमुखत: पांच पुरुषों की एवं एक महिला वाहन रैलियों में २५०० वाहनों के माध्यम से ३५०० देशभक्तों द्वारा जनजागरण किया गया। रैलियों में शामिल लोगों के साथ सीधे पहुंचे, ऐसे कुल ५००० से अधिक समाजजन शाम ६ बजे शहीद पार्क, फ्रीगंज पर आयोजित विशाल जनसभा में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम के अध्यक्ष पूज्य संत स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य (रामानुजकोट उज्जैन) ने उपस्थित देशभक्तों को चीन के बहिष्कार एवं स्वदेशी स्वीकार हेतु संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में अभियान के प्रांत संयोजक श्रीपाद जी कुलकर्णी मंच पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. विकास दवे, प्रबंधक सम्पादक देवपुत्र ने कहा कि चीन का विद्रोह हमारे लिए आर्थिक, सीमा सुरक्षा के साथ ही भावनात्मक आधार लिए हुए हैं। चीन के सस्ते और आकर्षक सामान के बारे में उन्होंने कहा कि हमारी जैसी भी माँ हो, वह पड़ोसी की माँ से अधिक सम्मानजनक होती है। चीन ने हमारे त्योहारों पर सांस्कृतिक एवं आर्थिक आक्रमण कर हमारे वास्तुशास्त्र आदि का स्वरूप धवस्त कर दिया है। हमारा १९ देशों से व्यापार है। उसमें सबसे अधिक चीन से है। हर वर्ष हमें चीन से ५२.७ विलियन डालर अर्थात ३४२५ अरब रुपये का व्यापारिक घाटा होता है। जो कि कुल विदेशी घाटे का ४१ प्रतिशत है। यदि पेट्रोल को अलग रखे तो ६० प्रतिशत से अधिक का घाटा है। चीनी सामान खरीदने के कारण हमारे छोटे और घरेलु उद्योग तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। हमारे बाजारों पर कब्जा करने के लिए चीन जान बूझकर सस्ता और हल्का माल भारत भेजता है। इससे पिछले १५ वर्षों में हमारे लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।

१९६२ में धोखे से युद्ध कर हमारी ४३,००० वर्ग किमी. भूमि पर कब्जा कर बैठा है। उस समय हमारे ३०८० जवान शहीद हुए।

अब भी अरूणाचल सहित ९०,००० वर्ग किमी भूमि पर दावा कर रहा है। हर आए दिन चीन के सैनिक हमारी सीमा में घुसपैठ करते हैं।

श्रीलंका म्यांमार (ब्रह्मदेश), बांग्लादेश पर अपने सैन्य व नौसैनिक अड्डे बनाकर भारत को चारों तरफ से घेरने व पड़ोसी देशों को हमारे खिलाफ खड़ा करने में लगा रहता है। पाकिस्तान में तो ३,१२० अरब रुपये का बड़ा आर्थिक भौगौलिक गलियारा (चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडर)भारत के विरोध के बावजूद बना रहा है और वर्तमान में डोकलाम विवाद की आड़ में हमारे पूर्वोत्तर के सात राज्यों को हड़पना चाहता है। शत्रु चीन आए दिन अपने विटो पावर का दुरुपयोग कर संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतरराष्ट्रीय मंच के समर्थन के बावजूद भारत विरोधी प्रस्तावों का पूरजोर विरोध करता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए अभियान के संयोजक कुलदीपक जोशी ने बताया कि अब तक अभियान के अंतर्गत उज्जैन शहर में १३६ वक्ताओं को प्रशिक्षित किया गया इन्हीं के द्वारा ६० मोहल्ला, १६ समाज, ७ महाविद्यालय, २८ विद्यालय, १९ कोचिंग क्लासेस, ८ व्यापारिक संगठन, 11 महिला मण्डल, ८ सेवा बस्ती, ९ भजन मण्डली, ५० योग प्रशिक्षु की बैठकों की माध्यम से ११ हजार पुरुष एवं ७५३ महिलाएं जनसामान्य एवं छात्र-छात्राओं के रूप में सम्मिलित हुए।

मोहल्ला टोलियों के माध्यम से चीनी सामान के बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओं के अपनाने के संदेश को लेकर स्टीकर एवं पत्रक के माध्यम से ५० हजार परिवारों से सम्पर्क किया गया। विभिन्न प्रकार की पांच चीनी सामान की प्रतिकात्मक शव यात्राओं में ७२६ विद्यार्थियों ने भाग लेकर चीनी सामान की होली जलाने का अभियान पूरा किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्जवलन एवं श्री दिनेश दिग्गज, श्री देवकृष्ण जी व्यास एवं श्री नरसिंह जी ईनानी कवियों की ओजस्वी देशभक्ति पूर्ण कविताओं से हुआ, जिनमें उन्होंने चीन की गिदड़ भपकी और हमारी सेना के शौर्य का वर्णन करते हुए चीनी सामान न खरीदने का आह्ववान किया। अतिथियों का अभिनन्दन महेश तिवारी एवं रमा पण्ड्या दीदी ने किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त, कर्नल राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि समाज के हौंसले एवं देश के मानबिन्दु तिरंगे, सैनिक वर्दी जैसे आदर्शों से प्रत्येक सैनिक को प्रेरणा मिलती है और वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने में  तनिक भी संकोच नहीं करता है। उक्त जानकारी  डॉ. शैलेष त्रिपाठी ने दी।

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