व्यापमं घोटाले के मुलजिम ने सीबीआई से मांगा आरोप पत्र का हिन्दी अनुवाद

इंदौर,  मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यापमं घोटाले के एक मुलजिम ने अर्जी पेश कर यहां एक विशेष अदालत से गुहार की है कि उसे सीबीआई द्वारा अंग्रेजी में पेश आरोप पत्र का हिन्दी अनुवाद उपलब्ध कराया जाये, ताकि वह इसे समझकर अपना बचाव कर सके। मामले के आरोपी उमेश श्रीवास्तव ने विशेष न्यायाधीश जेपी सिंह के सामने पेश आवेदन में कहा है कि अभियोजन ने उसके खिलाफ अंग्रेजी में आरोप पत्र पेश किया है। लेकिन इस भाषा का विस्तृत ज्ञान नहीं होने से वह आरोप पत्र के तथ्यों को समझकर अपना बचाव करने में असमर्थ है।

श्रीवास्तव ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह सीबीआई को आरोप पत्र का हिन्दी अनुवाद कराने का आदेश दे और और इसकी प्रति उसे मुहैया करायी जाये।

उधर, सीबीआई की ओर से आज अदालत में पेश लिखित जवाब में कहा गया कि व्यापमं घोटाले के आरोपी के खिलाफ अंग्रेजी में आरोपपत्र पेश किये जाने से किसी भी न्यायालय के नियम-कायदे का उल्लंघन नहीं होता है। उसकी अर्जी खारिज की जानी चाहिए, क्योंकि इससे प्रकरण की सुनवाई बेवजह लम्बी खिंच रही है। अदालत ने श्रीवास्तव की अर्जी पर दोनों पक्षों की बहस के लिए नौ अगस्त की तारीख तय की है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक रंजन शर्मा ने बताया कि अभियोजन ने अदालत में श्रीवास्तव के खिलाफ 29 जून 2016 को मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के साथ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468 और अन्य सम्बद्ध धाराओं के तहत आरोप पत्र पेश किया था। उन्होंने बताया कि श्रीवास्तव पर आरोप है कि वह फर्जीवाड़े के उस गिरोह में शामिल रहा है, जिसने तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की वर्ष 2011 में आयोजित प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में उम्मीदवारों को चयनित कराने के बदले उनके परिजनों से धन लिया था। उस समय पीएमटी के जरिये उम्मीदवारों को प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता था। पीएमटी फर्जीवाड़े को लेकर श्रीवास्तव और उसके तीन साथियों के खिलाफ इंदौर के संयोगितागंज पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

व्यावसायिक परीक्षा मंडल की आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर “प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड” कर दिया था।