विपक्ष के पास भ्रष्टाचार, विकास जैसे मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचा :पासवान

नयी दिल्ली, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने आज कांग्रेस समेत विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के पास भ्रष्टाचार और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचा है और वे कथित गोरक्षा के नाम पर अत्याचार के विषय को एक ही समुदाय के नाम पर उठाकर हथियार बना रहे हैं। उन्होंने लोकसभा में इस तरह घटनाओं की निंदा करते हुए इनके खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किये जाने का भी सुझाव दिया।

पासवान ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आदमी एक समय बचपन में लड़खड़ाता है और बाद में जवानी की दौड़ लगाता है। दूसरी बार बुढ़ापे में आदमी के पैर लड़खड़ाते हैं और फिर वह कब्र में जाता है। इसी तरह ‘‘कांग्रेस अब कब्र में जा रही है।’’ देश में अत्याचारों और भीड़ द्वारा हिंसा में जान से मारने की कथित घटनाओं से उत्पन्न स्थिति के बारे में लोकसभा में नियम-193 के तहत हुई चर्चा में भाग लेते हुए पासवान ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास भ्रष्टाचार और विकास जैसे मूलभूत मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह इस तरह के मुद्दे को उठा रहा है, जो विषय है ही नहीं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने दलितों पर अत्याचार की बात की लेकिन देश का राष्ट्रपति एक दलित बन गया है तो इस विषय पर भी विरोधियों के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है।

पासवान ने कहा, ‘‘एक ही मुद्दा बचा, गोरक्षा का। तो उसे एक समुदाय में बांधकर हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है।’’ उन्होंने इस तरह की लिंचिंग की घटनाओं पर कार्रवाई के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक तरफ विपक्ष संघीय ढांचे की बात करता है और दूसरी तरफ सारी जिम्मेदारी केंद्र पर डाल देता है। दोनों चीजें साथ में नहीं चल सकतीं।

कथित गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या की घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि असामाजिक तत्व गोरक्षा के नाम पर हालात का फायदा उठाना चाहते हैं और उन्होंने एक नहीं दो दो बार राज्यों से अपील की है कि ऐसे लोगों से कड़ाई से निपटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा करने वालों के लिए गुंडागर्दी शब्द तक का इस्तेमाल किया है।

पासवान ने कहा, ‘‘राज्यों की सरकार नहीं सुनती तो क्या प्रधानमंत्री फौज भेजें।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सवा तीन साल की सरकार में एक भी बार बाबरी मस्जिद, राम मंदिर, अनुच्छेद 377 और समान नागरिक संहिता की बात नहीं की है और बार बार ‘विकास’ की ही बात करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में हुए सिख नरसंहार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि तब एक, दो नहीं सैकड़ों लोग मारे गये थे।

पासवान ने कहा, ‘‘भीड़ द्वारा हत्या बहुत गंभीर मुद्दा है। हम इसकी घोर निंदा करते हैं।’’ पासवान ने कहा कि देश में राजनीतिक हत्याएं भी हो रही हैं, लेकिन लोग इस पर कुछ नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि केवल आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। इसे रोकने के लिए क्या सुझाव हैं, वो हमें देने चाहिए।

पासवान ने कहा कि आज सदन को इस तरह की घटनाओं के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित करना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को सभी राज्यों से अपील करनी चाहिए कि इस तरह की कोई भी घटना होने पर 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करें और दोषी व्यक्ति को जेल में डाला जाए। ऐसे लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया जाए।