व्याख्यान से हुआ विक्रम अमृत महोत्सव का आगाज़

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ (स्वराज संस्थान संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग) भोपाल के तत्वावधान में  आयोजित विक्रम अमृत महोत्सव का आगाज़ विक्रम कीर्ति मंदिर के सभागार में व्याख्यान से हुआ। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से आए राज्यसभा सांसद श्री प्रभात झा ने अपने व्याख्यान में महाराजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिकता पर कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली इतिहास रहा है जो वर्तमान परिप्रेक्ष में सभी राजनितीक प्रतिनिधियों को प्रेरणास्त्रोत के रूप में दिखाई देता है।
श्री प्रभात झा ने कहा कि राजा और प्रजा का स्वरूप ही राष्ट्र का स्वरूप होता है। विक्रमादित्य राष्ट्र रक्षा के प्रहरी के रूप में थे। जिन्होंने अपने राजधर्म को कर्म के रूप में जीवन में उतारा और राष्ट्ररक्षा की, तभी तो राष्ट्र चिंतन की श्रंखला में विक्रमादित्य ने विक्रम संवत् का प्रारंभ किया। इतिहास के वरिष्ठ लेखक राजमल ने अपनी पुस्तक में लिखा कि राजा युधिष्ठिर के बाद विक्रमादित्य ही ऐसे राजा थे, जिन्होंने जनता के कर्ज को स्वयं का कर्ज समझा और तद्अनुरूप जनता को ऋण के भार से मुक्त करने की योजना बनाई। आपने विक्रमादित्य को मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक बताते हुए कहा कि विक्रमादित्य ऐसे मनोविज्ञानी थे कि व्यक्ति चयन में दूरदृष्टि रखते हुए नवरत्नों का विशाल समुह निर्माण कर विषयगत आवश्यक योजनाओं में कटिबद्ध होकर एक सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक राष्ट्र का निर्माण किया। जो वर्तमान में सभी जनप्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक जीवन में उतारना चाहिए। आपने कार्यक्रम के पूर्व शोधपीठ कार्यालय का अवलोकन किया वहां पर शोध कार्यों से प्राप्त पुरा सामग्री की प्रशंसा करते हुए शोधपीठ कार्यालय के द्वारा किए कार्यों की सराहना की।
स्वागत भाषण में विधायक डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे संविधान में संशोधन होना चाहिए, क्योंकि संविधान में मान्यता शक संवत् को मिली है, जबकि विक्रम संवत् को मान्यता मिलनी चाहिए। जिसका अनुसरण हम भारतवासी 2100 साल से कर रहें हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने विक्रमादित्य संबंधी पुरातात्विक साहित्यिक साक्ष्यों का वर्णन करते हुए कहा कि कुछ साल पहले विक्रमादित्य का नाम लेने पर विद्वानों के बीच मतभेद पैदा होते थे किन्तु शोधपीठ द्वारा किए गए अन्वेषण कार्यों के द्वारा प्राप्त पुरा सामग्री से भ्रांतियाँ दूर हुई है एवं विद्वानों को प्रमाण प्राप्त हुए। मंच पर कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे एवं डॉ. प्रशांत पौराणिक उपस्थित थे। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सौम्य एवं पाणिनी पुस्तकों का विमोचन किया गया।

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