विद्युतीकरण अभियान के बावजूद ग्रामीण इलाकों में काफी घरों में अंधेरा : नीति

नयी दिल्ली, सरकार के ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान से लाभान्वित होने वाले अनेक गांवों के काफी घरों में अब भी अंधेरा है और उन्हें इसका फायदा ‘नहीं’ हुआ है। नीति आयोग की एक हालिया रपट में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसमें कहा गया है कि कई गांवों का हालांकि विद्युतीकरण हो चुका है, पर इनमें काफी परिवार अभी भी बिजली से वंचित हैं और उनके लिए स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को लालकिला से अपने संबोधन में कहा था कि अगले एक हजार दिन में बिजली सुविधाओं से वंचित 18,452 गांवों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। इसके लिए एक मई, 2018 की समयसीमा तय की गई है।

बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने मई में कहा था कि इन 18,452 गांवों में से 13,516 में बिजली पहुंचा दी गई है। 944 गांवों में आबादी नहीं है जबकि शेष 3,992 गांवों का एक मई, 2018 तक विद्युतीकरण किया जाएगा।

नीति आयोग ने राष्ट्रीय ऊर्जा नीति :एनईपी: के मसौदे में कहा है कि 30.4 करोड़ भारतीय अभी भी बिजली सुविधा से वंचित हैं।

अभी 50 करोड़ लोग खाना पकाने के लिए जैव ईंधन पर निर्भर हैं। देश को अभी ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने के लिए काफी इंतजार करना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययनों से यह सामने आया है कि पूर्व में कनेक्शन देने की योजनाओं और अब दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना :डीडीयूजीजेवाई: के बावजूद स्थिति में विशेष बदलाव नहीं आया है। बिजली पहुंच की स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है।

बिजली मंत्रालय को आड़े हाथ लेते हुए आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया में प्रमुख चुनौती यह है कि सिर्फ गांवों को लक्ष्य किया जा रहा है, घरों या परिवारों को नहीं।

कई ऐसे राज्य हैं जहां विद्युतीकरण की दर ऊंची है लेकिन परिवारों को बिजली नहीं मिल पा रही है।

नीति आयोग की यह रपट इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है वह सीधे अपने अध्यक्ष प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है। सरकार के नीति निर्धारण में उसके विचारों को शामिल किया जाता है।

इस बीच, नीति आयोग ने राष्ट्रीय ऊर्जा नीति के मसौदे पर टिप्पणी देने की तारीख बढ़ाकर 24 जुलाई, 2017 कर दी है।

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