आरिकुलर थेरेपी : कानों के जरिये गंभीर रोगों के उपचार का दावा करने वाली चिकित्सा पद्धति

नयी दिल्ली, पहले गांव-देहात के स्कूलों में अध्यापक प्राय: कुछ गड़बड़ी करने पर बच्चों के कान उमेठ देते थे। कान उमेठना भले ही छात्रों के लिए एक सजा हो किन्तु अब एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति भी लोकप्रिय हो रही है जिसमें कानों के जरिये कई गंभीर रोगों का उपचार करने का दावा किया जाता है।

Þआरिकुलर थेरेपी Þ नामक यह चिकित्सा पद्धति बेहद सस्ती होने और इसका स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न होने के कारण आम लोग इसकी ओर तेजी से आकषर्ति हो रहे हैं।

दक्षिण दिल्ली के Þआरिकुलर थेरेपी Þ के चिकित्सक श्रीज्योति ने पीटीआई भाषा को बताया, Þ Þ उक्त चिकित्सा पद्धति को मूलत: 1951 में फ्रांस के एक डॉक्टर पाल नोजियर :वर्ष 1908 . 1996: ने शुरू किया। उन्होंने शरीर के विभिन्न अंगों का सादृश्य बिन्दु कान में ढूंढ़ निकाला और इन बिंदु के जरिये विभिन्न अंगों के उपचार की तरीके को भी ढूढ़ निकाला। Þ Þ उन्होंने कहा, Þ Þकाफी प्रयोग और अध्ययन के बाद उन्होंने अपने पूरे काम के अनुभव को प्रकाशित किया तो चीन ने दावा किया कि यह तो उनका स्वदेशी तरीका है। चीन का तरीका पुराना था और अब यह पद्धति वहां अधिक प्रचलन में नहीं है लेकिन नोजियर ने जो आाधुनिक तरीका अपनाया था वह अधिक प्रभावी होने के कारण आज फ्रांस, जर्मनी सहित पूरे यूरोप, कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्से सहित जापान सहित दुनिया के कई हिस्से में प्रचलन में है। नोजियर ने अपने पूरे चिकित्सकीय अनुभव को वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेज बनाया और उसे सार्वजनिक किया। Þ Þ वर्ष 1990 में विश्व स्वास्थ्य संगठन :डब्ल्यूएचओ: ने भी घोषणा की कि Þआरिकुलर थेरेपी Þ संभवत: सर्वाधिक विकसित, बेहतर ढंग से दस्तावेजीकरण किये गये उपचार की पद्धति है।